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ब्रिक्स के निशाने पर अमेरिकी चौधराहट

Wed, 27 Mar 2013 12:50 AM IST
डरबन से विशेष प्रतिनिधि
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अमेरिका की ढुलमुल अर्थव्यवस्था और यूरोप के यूरो संकट से मुकाबले के लिए एकजुट हुए विश्व के पांच सबसे मजबूत विकासशील देशों के संगठन ब्रिक्स के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता की बाधाएं अभी दूर नहीं हुई हैं, लेकिन संकेत साफ हैं कि यह संगठन एक मजबूत राजनीतिक मंच का आकार ले रहा है।
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इसके शीर्ष नेताओं की ओर से बार-बार दी जा रही सफाई के बावजूद साफ तौर पर इसके निशाने पर अमेरिकी चौधराहट है। अपने बूते पर खड़े होने की कोशिश कर रहे ये पांचों देश अब अन्य देशों की स्थितियों पर गहराई से चिंतन करने लगे हैं।

यहां बुधवार को शिखर सम्मेलन के दौरान बंद कमरे की विशेष बैठक में सीरिया और अफगानिस्तान समेत कई वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श संभावित है।

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का यह संगठन हालांकि पहले भी वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करता रहा है, लेकिन अब इसे गंभीरता से लेने की स्थिति में है।
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शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ तौर पर कहा है कि ब्रिक्स को संवाद मंच की जगह अब बातचीत के कार्यशील अंतरराष्ट्रीय संगठन में तब्दील कर दिया जाए ताकि विश्व राजनीति के प्रमुख मुद्दों का समाधान खोजने के सफल प्रयास हो सकें।

पिछले साल दिल्ली में हुए चौथे शिखर सम्मेलन के दौरान भी सीरिया के हालात पर चर्चा हुई थी। रूस चाहता है कि दुनिया की 43 फीसदी आबादी समेटे ये पांचों देश एकमत होकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज बुलंद करें।

उधर, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, आधारभूत संरचना और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी इस मंच की ठोस भूमिका चाहते हैं।

रूसी राजनयिकों से मिले संकेतों के अनुसार डरबन शिखर सम्मलेन में नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद और साइबर खतरों के विरुद्ध लड़ाई को और मजबूत करने के लिए ठोस निर्णय लिया जा सकता है। ये ऐसे कदम हैं जो इन सभी देशों की समान चिंता को इंगित करेंगे।

लेकिन फोकस अफ्रीका पर है...
इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस अफ्रीका है। इससे तमाम अफ्रीकी देश आशान्वित हैं। बुधवार की ब्रिक्स देशों के साथ अफ्रीकी देशों की अलग से बैठक होगी जिनमें 10 से 12 देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रहेंगे। चीन के राष्टï्रपति शी जिनपिन ने तो कई अफ्रीकी देशों के शासनाध्यक्षों से अलग से बात करके उनके विकास में भागीदार बनने का भरोसा तक दिला दिया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की नजर भी अफ्रीकी देशों में निवेश पर टिकी है।
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