छत्तीसगढ़ के 'कातिल' नसबंदी कांड मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने मृतक महिलाओं के बच्चों को गोद लैने का फैसला किया है। रविवार को सीएम आवास पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया।
सरकार ने फैसला किया है कि प्रत्येक पीड़ित नाबालिग बच्चे के नाम पर दो लाख रुपये की एफडी की जाएगी और 18 साल की उम्र तक अपोलो हॉस्पिटल में उसका निशुल्क इलाज भी किया जाएगा।
इसके अलावा यह फैसला भी किया गया कि बालिग होने तक उसकी शिक्षा का भार भी सरकार ही उठाएगी। इस बैठक में सीएम रमन सिंह के अलावा कुछ मंत्री और वरिष्ठ अफसर भी मौजूद थे।
तमाम सवाल अभी भी बरकरार
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का ये नसबंदी कांड देश और दुनिया की सुर्खियों में है। अभी तक करीब 15 महिलाएं अपनी जान गवां चुकी हैं और कई की हालत अभी भी गंभीर है।
इस मामले में एक डॉक्टर, दवा की आपूर्ति करने वाले निदेशक और उसके बेटे को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन तमाम सवाल अभी भी बरकरार हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद से विपक्ष स्वास्थ्य मंत्री को हटाने का दवाब बना रहा है लेकिन सीएम रमन सिंह अपने खास अमर अग्रवाल को हटाने के लिए तैयार नहीं हैं।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी छत्तीसगढ़ पहुंच कर पीड़ितों का हाल चाल जाना था और कांग्रेसी नेताओं को आवश्यक निर्देश दिए थे।
क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में नसबंदी शिविर लगाए गए थे जिनमें सैंकडों महिलाओं का ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि दो ऐसी महिलाओं का भी ऑपरेशन कर दिया गया जो बैगा जनजाति की हैं। यह जनजाति संरक्षित जनजातियों में शामिल है।
खबर के मुताबिक हर चार मिनट में एक महिला का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में इस्तेमाल किए गए औजार संक्रमित थे और ऑपरेशन रूम भी गंदा था जिसके कारण महिलाओं को सेप्टिसेमिया हो गया था।
इस मामले में सीएम ने स्वास्थ्य मंत्री पर कोई कार्रवाई करने से इंकार कर दिया था और संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवीय त्रासदी बताया था।
गौरतलब है कि इससे पहले भी ऐसी गंभीर चूक के दो मामले छत्तीसगढ़ से ही सामने आ चुके हैं। एक मामले में जहां 62 लोगों ने अपनी आखें गवां दीं वहीं दूसरे मामले में महिलाओं का गर्भाशय निकाल लिया गया था।