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छत्तीसगढ़ में ही क्यों होते हैं ऐसे दर्दनाक हादसे?

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छत्तीसगढ़ से 13 महिलाओं की ऑपरेशन के बाद मौत का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इन 13 महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन हुआ था।
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छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले में चार डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है और मृतकों के परिवार को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। गंभीर रूप से बीमारों को भी 50-50 हजार रुपये सहायता देने का आदेश किया गया है।

खबर के मुताबिक हर चार मिनट में एक महिला का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में इस्तेमाल किए गए औजार संक्रमित थे और ऑपरेशन रूम भी गंदा था जिसके कारण महिलाओं को सेप्टिसेमिया हो गया था।
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सीएम ने स्वास्थ्य मंत्री पर कोई कार्रवाई करने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि,"ऑपरेशन मंत्री ने नहीं किया डॉक्टरों ने किया है।"

संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवीय त्रासदी बताया है और पीएम मोदी ने भी फोन पर मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी ऐसी गंभीर चूक के दो मामले छत्तीसगढ़ से ही सामने आ चुके हैं। एक मामले में जहां 62 लोगों ने अपनी आखें गवां दीं वहीं दूसरे मामले में महिलाओं का गर्भाशय निकाल लिया गया था।

चर्चाओं में रहा था गर्भाशय निकाल लेने का मामला

2012 में एक ऐसा मामला सामने आया था जिसमें कुछ महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए गए थे। खबर के मुताबिक महिलाएं किसी छोटी मोटी बीमारी का इलाज कराने निजी अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने उन्हें डरा दिया।

उनसे कहा गया कि गर्भाशय नहीं निकलवाओगी तो कैंसर हो जाएगा जिससे मौत हो सकती है। इस बात से गरीब महिलाएं डर गईं और अपने गर्भाशय निकलवा दिए।

दरअसल निजी अस्पतालों ने ये ऑपरेशन स्वास्थ्य बीमा कार्ड के कारण किए थे जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत वहां बांटे गए थे। इनकी लिमिट 30 हजार रुपये थी और डॉक्टरों ने इसके लिए ही ये ऑपरेशन कर डाले।

इस प्रकरण ने देश विदेश में बहुत सुर्खियां बटोरीं थीं और इस विपक्ष ने गर्भाशय घोटाले का नाम दिया था। इस मामले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था और कुछ अस्पतालों के लाइसेंस में छीने गए थे लेकिन किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार अभी भी है।
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62 लोगों ने खो दीं अपनी आखें

2011 में भी एक ऐसा मामला सामने आया था जिसमें करीब 62 लोगों ने अपनी आखों की रोशनी गवां दी थी। 2013 में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि दुर्ग, बालोद और महासमुंद जिले में नेत्र शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान 62 मरीजों ने अपनी आंख की रोशनी खोई है।

उन्होंने बताया था कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान बालोद जिले में 44 मरीजों ने, दुर्ग जिले में चार मरीजों ने तथा महासमुंद जिले में 14 मरीजों ने आंखों की रोशनी खोई है। इस मामले में नौ लोग निलंबित हुए थे लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यह प्रकरण काफी चर्चाओं में रहा था। जांच में पता चला था कि ऑपरेशन थियेटर और अस्पताल की गंदगी के कारण वहां संक्रमण फैल गया था और इसी वजह से आखों की रौशनी चली गई थी।
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