बिहार के आरा में सिविल कोर्ट परिसर में शुक्रवार सुबह एक महिला ने खुद को धमाके से उड़ा दिया। इस आत्मघाती हमले में महिला हमलावर सहित दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हो गए।
घायलों में तीन की हालत नाजुक है। पुलिस का दावा है कि विचाराधीन कैदियों को छुड़ाने के लिए महिला ने आत्मघाती विस्फोट किया। इस घटना का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
सुबह करीब 11:30 बजे हुई इस घटना के बाद सिविल कोर्ट परिसर की नाकेबंदी कर दी गई। विस्फोट के बाद मची अफरा-तफरी का फायदा उठाते हुए दो कैदी फरार हो गए। पटना से अतिरिक्त पुलिस बल को आरा भेजा गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक टीम भी पटना से आरा पहुंच गई है।
पटना में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि एक पुलिस वैन में लाए गए विचाराधीन कैदियों को कोर्ट में ले जाया जा रहा था, तभी विस्फोटकों से लैस करीब 35 से 40 वर्ष की एक महिला ने धमाका कर दिया। उन्होंने महिला के मानव बम होने की आशंका को खारिज नहीं किया है।
महिला के शरीर पर बम से जुड़ी चीजें मिली हैं। उसके पास से एक मोबाइल भी मिला है। इस विस्फोट में महिला सहित एक पुलिस कांस्टेबल अमित कुमार की मौत हो गई।
आरा सदर के एडीएम अनिल कुमार ने बताया कि आत्मघाती के रूप में महिला की पहचान की गई है। बताया जाता है कि महिला एक झोले में बम लेकर हाजत की ओर आ रही थी। उसी दौरान सिपाही ने उसे रोकने की कोशिश की और धमाका हो गया।
आरा के पुलिस अधीक्षक अख्तर हुसैन ने बताया कि विस्फोट के बाद मची अफरा-तफरी का फायदा उठाकर पेशी के लिए लाए गए कैदी लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय फरार हो गए। इससे पूर्व वर्ष 2009 में भी लंबू शर्मा की पेशी के दौरान आरा कोर्ट परिसर में विस्फोट किया गया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। हालांकि, तब असामाजिक तत्व लंबू शर्मा को फरार कराने के अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए थे।