विदेशों में काला धन जमा करने वाले या अघोषित आमदनी से प्रॉपर्टी बनाने वालों की घोषणा के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने जो कंप्लायंस विंडो खोला था, उसमें अधिकतर छोटी मछली ही हैं। पहले जिस तरह से बताया जा रहा था कि इसमें बड़ी मछली भी फंसेगी, उस हिसाब से सरकार को कामयाबी नहीं मिली है।
इस विंडो के तहत 90 दिनों में 638 घोषणाएं आईं हैं, जिसमें 4,147 करोड़ रुपये का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग के एक सूत्र के मुताबिक कंप्लायंस विंडोके तहत आई 638 घोषणाओं में अधिकतर इंडिविजुअल श्रेणी के करदाता हैं, वो भी प्रोफशनल।
इनमें भी वैसे करदाताओं की भरमार है, जो कभी विदेशों में काम करते थे और उसी दौरान वहां के बैंकों में खाता खोला था। वहां से वापसी तो हो गई लेकिन वहां के बैंक खाते चल रहे हैं या फिर वहां कोई छोटी-मोटी संपत्ति खरीद ली थी।
यहां आकर पता चला कि भारतीय आयकर कानून के तहत यह काला धन है क्योंकि इसकी जानकारी भारतीय आयकर विभाग के पास नहीं है।