काले धन के मुद्दे पर मचे हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस की यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी यात्रा से ठीक पहले एचएसबीसी बैंक से जुड़े पूर्व कर्मचारी और व्हिसलब्लोअर ने एक खुला पत्र पीएम मोदी को भेजा है।
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'द कारवां' में छपे इस खुले पत्र पर गौर करें तो 15 दिसंबर 2014 को काले धन के मुद्दे पर भारतीय जांच अधिकारी पेरिस पहुंचे था। जहां उन्होंने फ्रांसीसी व्हिसलब्लोवर और एचएसबीसी के पूर्व कर्मचारी रहे एहवे फलचीनी से मुलाकात की।
उस समय फलचीनी ने कहा था कि वो काले धन पर भारत का बहुत सहयोग कर सकते हैं। उनके पास काले धन को लेकर कई जानकारियां हैं जिसका फायदा भारतीय जांच एजेंसियों को मिल सकता है।
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काले धन पर बड़े खुलासे का ऐलान
फलचीनी ने अपने खुलासे में बताया है कि कैसे बैंक अपने क्लाइंट्स को इससे जोड़ते हैं और उनके लाखों-करोड़ों डॉलर अपने खाते में रख लेते हैं। इसमें मनीलॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के कई मामले होते हैं। जिन्हें बैंक के नियमों की वजह बचा लिया जाता है।
फलचीनी के मुताबिक इसकी शुरूआत साल 2008 से हुई है जब फलचीनी एचएसबीसी बैंक, जेनेवा में टेक्निकल एनालिस्ट के तौर पर कार्यरत थे। उस समय उन्होंने फ्रेंच अथॉरिटी से जुड़े बैंक डाटा लीक किए।
फ्रांस की ओर से ये डाटा कई हिस्सों में दुनिया के विभिन्न देशों के बीच भेजे गए। इस लिस्ट को ही 'एचएसबीसी लिस्ट' कहा गया। भारत को ये लिस्ट साल 2011 में मिली।
हालांकि फलचीनी के मुताबिक वो हमेशा इस कोशिश में थे कि लीक हुए डाटा की पूरी सूची जरूरतमंद देशों को मुहैया करा सकें और जिससे जांचकर्ताओं को इसका फायदा मिल सके। जांच अधिकारी इस बैंक के साथ-साथ दूसरे बैंकों में भी जमा काले धन को लेकर अपनी जांच तेज कर सकें।
मोदी सरकार से सहयोग की अपील
पेरिस में मीटिंग के बाद फरवरी में फलचीनी ने दावा किया कि उन्होंने भारत सरकार को अपने दस्तखत किए हुए प्रस्ताव को भेजा, जिसमें उन्होंने काले धन पर उनके सहयोग की पेशकश की थी।
इसके बाद भारत के आयकर विभाग ने फलचीनी को एक ऑफर देते हुए उनके सहयोग से मिलने वाली बैंक रेवेन्यू का 5 फीसदी हिस्सा देने की बात कही थी।
फरवरी 2015 में फ्रेंच समाचार पत्र 'ली मोन्डे' ने जांच से मिले एचएसबीसी डाटा की पहली किस्त प्रकाशित की। इसी डाटा की बदौलत दुनिया के 40 देशों में पत्रकारों को इससे जुड़ी जानकारियां मिली। इस ऑपरेशन को 'स्विसलीक्स' नाम दिया गया।
'स्विसलीक्स' से हुए कई खुलासे
'स्विसलीक्स' के सामने आने के बाद सभी देशों में इस स्कैंडल का शोर देखने को मिला। भारत में 'इंडियन एक्सप्रेस' ने सबसे पहले 100 भारतीयों की लिस्ट वह लिस्ट प्रकाशित की जिनके स्विस बैंक में अकाउंट थे।
स्विसलीक्स ने इसके बाद भी कई और भारतीय क्लाइंट्स के नाम उजागर किए। जिसके जांच एजेंसियों को करीब 682 अकाउंट होल्डर्स के नाम मिल गए, जो कि अब बढ़कर 1,195 तक पहुंच चुकी है।
लेकिन भारत सरकार को अभी भी फलचीनी के निकाले गए सभी डाटा नहीं मिले हैं। हालांकि व्हिसलब्लोअर अभी भी कह रहा कि "वह भारत का सहयोग करना चाहता है।"
फलचीनी ने एक खुला खत प्रधानमंत्री मोदी को भेजा है। फलचीनी के भेजे गए पत्र की अहम बातें क्या थी चलिए आपको बताते हैं।
प्रिय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी मैं आपको ये पत्र इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि मैं काले धन के मुद्दे पर भारत सरकार का समर्थन करना चाहता हूं। इस समस्या के निपटारे को लेकर आपके दृढ़ संकल्प को देखते हुए मुझे ये हिम्मत हुई कि मैं ये पत्र आपको भेज सकूं। मेरी आपसे गुजारिश है कि मैं काले धन के मुद्दे पर आपका सहयोग करना चाहता हूं। इसलिए आपसे गुजारिश है कि आप अपनी पेरिस यात्रा के दौरान एक बार मुझे मिलने का अवसर जरूर दें। इस मुलाकात में मैं आपको ये दिखाना चाहता हूं कि कैसे मैं आपकी इस मुद्दे पर सहयोग कर सकता हूं।
मेरे पास इस मुद्दे पर कई अंदरूनी जानकारों, क्लाइंट ऑफिसर्स और दूसरे ऐसे लोगों की टीम है जो इस मामले में काफी अहम रोल अदा कर सकते हैं। मैं चाहता हूं कि आप अगर सहयोग कर दें तो कई ऐसे व्हिसलब्लोअर हैं जो इस मुद्दे पर कई अहम खुलासे कर सकते हैं।
हम भारत सरकार के काले धन के मुद्दे पर लाए जाने वाले नए काले धन विरोधी बिल का स्वागत करते हैं। इसके साथ ही हम इन खुलासों से केवल भारत ही नहीं ऐसे दूसरे देशों को भी सहयोग कर सकते हैं जो कहीं न कहीं इससे जुड़े हुए हैं।
1- छुपी जानकारियों के खुलासे के लिए पारदर्शिता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए स्वतंत्र संस्थाओं और सिविल सोसायटी को ऑडिट की जिम्मेदारी मुहैया कराने की व्यवस्था हो। एक ऐसा रास्ता बने जिससे कि कोई भी सूचना और जांच से जुड़े खुलासे सीमाओं से परे रहकर एक-दूसरे को मुहैया कराया जा सके। जिससे की गलत ढंग से कार्य करने वालों पर लगाम लगाई जा सके।
2- किसी एक व्यक्ति या फिर संस्था की जगह खास फोकस इससे जुड़े जवाबदेह बैंकों पर दिया जाए। एक ऐसा मैकेनिज्म बनाया जाए जिससे उन बड़े संस्थानों पर खास ध्यान दिया जा सके जिनके पैसे विदेश भेजे जाते हैं। कारपोरेट टैक्स किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए बेहद जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होता है तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीबों को उठाना पड़ता है। इसलिए इस असमानता को बदलने की जरूरत है।
3- व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्सन कानून को मजबूत बनाने की जरूरत है। जिससे इससे जुड़े लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जा सके। ये खास तौर से सरकारी नौकरियों में शामिल लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में शामिल लोगों को भी इसमें शामिल किया जा सके।
न्यूटन ने कहा था कि हमने कई दीवारें तो बना दी लेकिन पर्याप्त पुल नहीं बनाए। लेकिन मैं एक पुल भारत के साथ बनाना चाहता हूं और चाहता हूं उन हजारों भारतीयों का साथ जो खुद को मेरी बातों से जुडा़ हुआ महसूस कर रहे हैं। मैं आशा करता हूं कि आप मुझे एक बार सहयोग का मौका जरूर देंगे।