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भाजपा की महिला नेताओं पर भारी पड़ रही है शनि की वक्र दृष्टि

Thu, 25 Jun 2015 07:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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हालांकि यह महज एक संयोग है, मगर जून का महीना भाजपा की महिला नेताओं पर भारी पड़ रहा है। भ्रष्टाचार के आरोपी आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की मदद के सवाल पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के घिरने के बाद बुधवार को पार्टी की दो और महिला नेता विवादों में घिर गईं।
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मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी चुनाव में नामांकन के दौरान गलत हलफनामा देने के मामले में घिरीं तो महाराष्ट्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे आदिवासी बच्चों को दी जाने वाले सुविधाओं की खरीद के गड़बड़झाले में उलझ गईं।

दिल्ली की स्थानीय अदालत ने जहां गलत हलफनामा मामले में दायर याचिका से स्वीकार कर स्मृति की परेशानी बढ़ा दी। वहीं ई टेंडर केजरिए खरीददारी के प्रावधान को ताक कर रख कर 206 करोड़ की सीधी खरीददारी का आदेश दे कर मुंडे विपक्ष के तीखे हमले का शिकार हो रही हैं।
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पार्टी के लोगों के अलग अलग सुर से बढ़ रही परेशानी

इन चार में से तीन मामलों में फिलहाल पार्टी में उपजे अलग-अलग सुर से भी इन महिला नेताओं की परेशानी बढ़ गई है। सुषमा और वसुंधरा के बचाव में उतरी सरकार और पार्टी को विपक्ष के साथ-साथ जहां अपनों का भी हमला झेलना पड़ रहा है।

वहीं महाराष्ट्र सरकार के दूसरे मंत्री पंकजा के बचाव में उतरने के बदले खरीद के तरीके पर खुद ही परोक्ष सवाल उठा रहे हैं। हालांकि स्मृति के मामले में सरकार और पार्टी ने फिलहाल कोई स्टैंड नहीं लिया है।

मगर गृह मंत्री ने यह कह कर उनके बचाव का संकेत दिया है कि यहां इस्तीफा नहीं होता क्योंकि यह एनडीए है यूपीए नहीं।

इस कारण से हैं विवादों में:

सुषमा स्वराज- ललित मोदी को ट्रेवल वीजा दिलाने के लिए की गई पैरवी से विवादों में घिरी। उन्हें पार्टी, सरकार और संघ का साथ मिला। मगर एक सांसद ने जहां इस मुद्दे पर सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री पर निशाना साधा, वहीं दूसरे सांसद ने मदद को सार्वजनिक रूप से गलत करार दिया।
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इस वजह से हैं संकट में

वसुंधरा राजे- राजस्थान की सीएम मोदी के पक्ष में नाम खुलासा न करने की कड़ी शर्त पर ब्रिटेन में उनके पक्ष में गवाही देने केआरोपों के बाद निशाने पर। उनके सांसद बेटे दुष्यंत की कंपनी का ललित मोदी द्वारा कई गुणा अधिक कीमत पर शेयर खरीदने के खुलासे से बढ़ी मुश्किलें। फिलहाल उन्हें पार्टी और सरकार का समर्थन हासिल।

स्मृति ईरानी- वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे में खुद को बीए पास बताया तो जुलाई 2011 के राज्यसभा चुनाव में खुद की शिक्षा बीकॉम पार्ट वन बताई। अदालत द्वारा याचिका स्वीकार करने के बाद बढ़ी परेशानी। मामला अदालत में होने के कारण फिलहाल सरकार और पार्टी चुप।

पंकजा मुंडे- आदिवासी बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं के लिए खरीद मामले में नियमों को ताक पर रखने का आरोप। मुंडे ने 206 करोड़ की खरीददारी केलिए ईटेंडर नहीं मंगाया। सीधी खरीददारी का आदेश दे कर घिरीं। पार्टी के वरिष्ठ मंत्री फिलहाल नहीं कर रहे हैं बचाव।
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