भाजपा इस बार भी लोकसभा की सियासी जंग के मैदान में उतारने के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम अंतिम समय पर ही घोषित करेगी। चयन प्रक्रिया फरवरी से शुरू करने का ऐलान करने वाली पार्टी अब मार्च से इस मामले में पहल करेगी।
इस देरी की एक बड़ी वजह यह है कि भाजपा को आशंका है कि प्रत्याशियों के नाम जल्दी घोषित कर देने से पार्टी में बगावत के सुर उठ सकते हैं। ऐसे में पार्टी बागियों को दूसरे दलों से संपर्क साधने का समय भी नहीं देना चाहती है।
11 फरवरी को सांसदों से रूबरू होंगे मोदी
इधर, लोकसभा चुनाव की तैयारी के मद्देनजर पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी 11 फरवरी को पार्टी के सभी सांसदों से रूबरू होंगे। सांसदों के साथ मोदी की यह पहली बैठक होगी।
भाजपा ने हालांकि प्रत्याशियों के चयन के लिए कागजी तैयारी जारी रखी है, लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति की बैठकों का दौर मार्च से ही शुरू होगा।
टिकटों के लिए मच सकती है मारामारी
भाजपा भले ही प्रत्याशियों के नामों की सूची पहले ही तैयार कर दे, लेकिन तय है कि उनके नाम घोषित अंतिम समय में ही होंगे। सिर्फ मौजूदा सांसदों में से जिन्हें फिर से चुनाव मैदान में उतारना है, उनके नाम ही पहले घोषित हो सकते हैं।
दरअसल, पार्टी को इस बार सत्ता बहुत निकट दिख रही है, ऐसे में टिकटों के लिए भी ज्यादा मारामारी होने की संभावना है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मतदान से एक माह पहले भी प्रत्याशी का नाम घोषित हो जाने के बाद चुनाव प्रचार के लिए काफी समय मिल जाता है। इसलिए भाजपा अब प्रत्याशियों के चयन के लिए मार्च से ही बैठकें कर मंथन शुरू करेगी।