छत्तीसगढ़ की नक्सली घटना पर कांग्रेस के सियासी हमलों पर अब तक बचाव की मुद्रा में रही भाजपा अब हमलावर रुख के साथ मैदान में कूद पड़ी है।
कांग्रेस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने चेतावनी दी कि यदि उसने अनर्गल बयानबाजी बंद नहीं की तो नक्सलियों के साथ उसके संबंधों का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
सलवा जुडूम की फिर से वकालत करते हुए भाजपा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सली समस्या का इसी के चलते सफाया हुआ और यह अब सिर्फ बस्तर तक सिमट कर रह गया है।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ छत्तीसगढ़ का दौरा कर लौटे महासचिव जेपी नड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत सलवा जुडूम में बदलाव हो सकता है, लेकिन नीतिगत तौर पर सलवा जुडूम सही है।
छत्तीसगढ़ के चुनाव में इस मुद्दे के हावी रहने की संभावना देख भाजपा अब नक्सल समस्या का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ने की तैयारी में जुट गई है।
नड्डा ने कहा कि वास्तव में 90 के दशक में संयुक्त मध्य प्रदेश के समय मोतीलाल वोरा के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश में यह समस्या शुरू हुई और दिग्विजय सिंह के शासन में फलफूल गई। जबकि भाजपा के शासन में यह मात्र बस्तर तक सिमट गई है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा घटना में भी स्थानीय नक्सलियों की बजाए आंध्र प्रदेश से आए नक्सलियों का हाथ रहा है। मौके पर तेलुगू में लिखे पत्र इसका सबूत है। न्यायिक जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
नक्सली हिंसा में मारे गये कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा को राष्ट्रवादी करार देते हुए नड्डा ने कहा, ‘महेंद्र कर्मा सलवा जुडूम के लिए लड़ रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने उनकी मदद नहीं की। दंतेवाड़ा में नक्सली हिंसा में 76 सुरक्षा जवानों के मारे जाने के बाद तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम नक्सलियों के खिलाफ जारी अभियान को मदद करने लगे थे। मगर दिग्विजय सिंह के पत्र पर केंद्र ने यह अभियान रोक दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस संबंध में सफाई देनी चाहिए।’
उन्होंने कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए कहा कि वास्तव में कांग्रेस अपने हित के लिए नक्सलियों की भी मदद लेती रही है।
योजना आयोग और खुद सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में कई नक्सल समर्थक लोग शामिल हैं।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को लेकर उन्होंने कहा कि मंत्री को नक्सल को लेकर अध्ययन करना चाहिए। उन्हें पता लगाना चाहिए कि मनरेगा का पैसा नक्सलियों की जेब में जा रहा है कि नहीं।