जेएनयू मामले में मीडियाकर्मियों की पिटाई और अदालत में वकीलों की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के गंभीर रुख अपनाने से भाजपा चिंतित तो है, मगर पार्टी का इरादा इस मामले में बैकफुट पर आने के बदले आक्रामक रुख अपनाने का है।
पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि जेएनयू की घटना को सीधे सीधे राष्ट्रवाद से जोड़ कर सियासी बढ़त हासिल की जा सकती है। यही कारण है कि पार्टी ने जहां बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय जनस्वाभिमान अभियान छेड़ने की घोषणा की है, वहीं संसद के बजट सत्र में भी इस मामले में विपक्ष को आक्रामक तेवर दिखाने का फैसला किया है।
इस रणनीति के तहत मंगलवार से शुरू हो रहे बजट सत्र में खुद पार्टी ही इस मामले में चर्चा कराने का नोटिस देगी। इस बीच पार्टी ने अपने प्रवक्ताओं को टीवी चैनलों की बहसों और प्रेस कांफ्रेंसों में जेएनयू में लगे राष्ट्रविरोधी नारे पर मजबूती से अपना विरोध जताने का निर्देश दिया है।
पार्टी के प्रवक्ता इस मामले में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार छात्र नेता कन्हैया कुमार की 9 फरवरी को कार्यक्रम के दौरान लगे भारत विरोधी नारे की स्वीकारोक्ति को भी मुद्दा बनाएगी।