सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी तरह के उग्र रुख से देश का भला नहीं होगा। शीर्ष अदालत ने कहा है कि हर समूह और हर समुदाय को उदारता बरतने की जरूरत है।
अदालत ने यह भी कहा कि हम सभी देशभक्त हैं और कोई भी मातृभूमि को बदनाम नहीं करना चाहता लेकिन सवाल यह है कि क्या हम किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथों में लेने की इजाजत दे सकते है? न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ ने कहा कि जब भी अदालत कोई संवेदनशील मामले में सुनवाई करती है तो समाज का हर समूह और वर्ग अपना नजरिया व्यक्त करना चाहता है और लोग विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी कर तनाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
साथ ही अदालत ने कहा कि हिंसा कहीं नहीं होनी चाहिए चाहें वह अदालत परिसर में हो या कहीं और। पीठ ने कहा कि पुलिस पर दोष लगाना सबसे आसान है। कभी उनकी निष्क्रियता को लेकर तो कभी ज्यादती को लेकर।