पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक की मेहमाननवाजी गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को भारी पड़ गई है। बड़बोले मलिक के बयानों पर भाजपा ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। साथ ही गुजरात में चल रहे चुनाव के मद्देनजर मलिक के बाबरी संबंधी बयान पर कांग्रेस के भीतर भी इस यात्रा के समय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर यूपीए को आड़े हाथों लिया। चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर सीधा हमला बोल रहे मोदी ने कहा कि सरकार के पास मलिक के बयान का जवाब देने का साहस ही नहीं है।
उधर गुजरात में मौजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने भी मलिक के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मलिक ने बाबरी विध्वंस की तुलना 26/11 जैसे आतंकी घटनाओं से कर साबित कर दिया है कि वह नकारात्मक रवैये के साथ शांति की बात कर रहे हैं। जेटली ने सरकार पर सवाल खड़ा किया कि वह पाक की जमीन से उपजे आतंकवाद पर ठोस बात किए बिना वीजा नियमों में ढील जैसे मुद्दों पर कैसे बात कर सकती है।
गौरतलब है कि नए वीजा करार को लागू करने के मकसद से आए मलिक के बड़बोलेपन की आदत से सरकार सचेत जरूर थी। यही वजह है कि शिंदे और मलिक की साझा प्रेस कांफ्रेंस के तय कार्यक्रम को आखिरी वक्त में रद्द कर दिया गया।
सरकार को अंदेशा था कि मौजूद संसद सत्र के दौरान मलिक या शिंदे के जुबान फिसलने पर विपक्ष हंगामा खड़ा कर सकता है। लेकिन वीजा नियम लागू करने की औपचारिकता के दौरान बोलने के छोटे से मौके ने ही सरकार के अंदेशे को सच साबित कर दिया।