नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व में आम चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली भाजपा को चुनावी राज्यों में कद्दावर चेहरा तलाशने में पसीने छूट रहे हैं। दमदार चेहरे की तलाश में एक नहीं कई अड़चनें हैं।
चुनावी राज्यों के कई असरदार नेता फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल की शोभा बढ़ा रहे हैं तो असरदार होने के बावजूद कुछ नेताओं की उम्र आड़े आ रही है।
कुछ ऐसे भी राज्य हैं जहां मोदी की बदौलत पार्टी को जबरदस्त जीत तो हासिल हो गई है, मगर संबंधित राज्य में ऐसा कोई कद्दावर नेता ही नहीं है जिसे बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार पेश किया जा सके।
भाजपा के सामने साख बचाना चुनौती
भाजपा के सामने मुश्किल यह है कि उसे अपनी साख बनाए रखने को विधानसभा चुनाव की अग्नि परीक्षा की वैतरणी पार करनी है।
हल न निकलने की स्थिति में पार्टी में अभी से चुनावी राज्यों खासतौर से महाराष्ट्र और हरियाणा में किसी एक चेहरे को पेश करने के बदले सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरने पर मंथन शुरू हो चुका है।
इसी तरह दिल्ली और झारखंड जैसे राज्य जहां कभी भी चुनाव हो सकते हैं, पार्टी नेतृत्व तमाम मशक्कत के बावजूद दमदार चेहरे की तलाश नहीं कर पाया है।
चार महीनों में दो राज्यों में होने हैं चुनाव
लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद चुनावी राज्यों में एक अदद कद्दावर नेता की तलाश पूरी नहीं हो पा रही है। खासतौर से करीब चार महीने बाद जिन दो राज्यों महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां पार्टी नेतृत्व किसी एक नेता को आगे कर चुनाव मैदान में उतरने की स्थिति में नहीं है।
महाराष्ट्र में गोपीनाथ मुंडे के निधन के कारण जहां पार्टी की विधानसभा चुनाव की तैयारियों को झटका लगा है, वहीं हरियाणा में पहली बार 10 में से 7 सीटें जीतने के बाद पार्टी के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो भरोसे के साथ चुनावी नैया पार लगा सके।
सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इन दोनों ही राज्यों में पार्टी के पास सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। यही कारण है कि महाराष्ट्र में पार्टी ने विनोद तावड़े, देवेंद्र फडनवीस, एकनाथ खड़से और सुरेंद्र एम को अलग-अलग इलाके की जिम्मेदारी सौंपी है।
माना जा रहा है कि हरियाणा में भी पार्टी किसी को मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने के बदले वर्तमान पार्टी अध्यक्ष रामबिलास शर्मा की जगह किसी अन्य नेता को कमान देगी।
यशवंत सिन्हा की उम्र आड़े आ रही
दरअसल आम चुनाव में मोदी के नाम पर कई राज्यों में पार्टी की वैतरणी पार लग गई। पार्टी ने बिहार, झारखंड, दिल्ली, असम जैसे राज्यों भी जबरदस्त प्रदर्शन किया।
बंगाल में महज मोदी के नाम पर पार्टी को 17 फीसदी वोट हासिल हो गए। मगर जहां तक विधानसभा चुनाव की बात है तो इन राज्यों में कोई एक कद्दावर नेता नहीं है जिसके दम पर पार्टी चुनावी नैया पार कर सके।
झारखंड में यशवंत सिन्हा की उम्र आड़े आ रही है तो पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के भरोसे पार्टी मैदान में नहीं उतर सकती। दिल्ली में डॉ हर्षवर्धन के मंत्रिमंडल में शामिल हो जाने के बाद स्थानीय स्तर पर कद्दावर नेता की कमी साफ महसूस की जा रही है।
यही हाल बंगाल और असम का है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल उसकी मुख्य चिंता महाराष्ट्र और हरियाणा की है जहां इसी साल चुनाव होने हैं। चूंकि अन्य राज्यों में चुनाव होने में देरी है, इसलिए इन राज्यों में नए नेतृत्व को आगे लाए जाने के लिए पर्याप्त समय है।