गैंगरेप में बरती गई हैवानियत रोंगटे खड़े कर देने वाली है। यूपी के मुजफ्फरनगर बसधाड़ा के जंगल में युवती चीख-चीखकर कह रही है कोई मुझे बचा ले।
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आरोपी बेबस युवती की अस्मत रौंदने के साथ ही उसे बेरहमी से पीट कर रहे हैं। सोमवार को गैंगरेप की क्लिपिंग में यह सच सामने आया तो लोगों के होश उड़ गए।
शाहपुर कसबे के एक चिकित्सक के क्लीनिक पर बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली युवती गैंगरेप के दस माह बाद भी दहशत और जिल्लत के साए में जी रही है।
यही वजह है कि पीड़िता ने दुष्कर्म के मामले का भयावह मंजर न परिवार को बताया और न ही पुलिस को।
बियावान जंगल में दब गई थीं युवती की चींखें
क्लिपिंग का मामला सोमवार की रात डीएम कौशलराज शर्मा और एसएसपी एचएन सिंह के सामने पहुंच गया।
आरोपियों के दूसरे संप्रदायों से जुड़े होने पर कोई बड़ा बवाल न हो, इससे पहले ही डीएम ने क्राइम ब्रांच को आरोपियों के घरों पर दबिशों के आदेश दे दिए।
रात में पुलिस युवती की खोज में गुड़गांव तक पहुंच गई। पीड़िता से पूरी घटना की जानकारी ली गई फिर आरोपियों को पहचान कर रात में ही बसधाड़ा में दबिश दी गई।
तीन आरोपियों को हिरासत में लिए गए और बाकि के परिजनों को उठाकर थाने लाया गया। पीड़ित युवती मंगलवार को अपनी मां के साथ थाने पहुंची और आरोपियों की शिनाख्त की।
दस माह बाद सामने आई गैंगरेप की हैवानियत
परिवार की माली हालत भी ऐसी नहीं थी कि पीड़िता दुराचारियों से लड़ाई लड़ सके। हालात की मजबूरी के आगे उसे शहर और गांव छोड़ना पड़ा।
गैंगरेप की पूरी हकीकत दबी हुई थी। अचानक आरोपियों में से किसी के मोबाइल से क्लिपिंग लीक हो गई। 49 सेकेंड की क्लिपिंग को जिसने भी देखा होश उड़ गए।
युवती चिल्ला-चिल्लाकर छोड़ देने की भीख मांग रही थी, लेकिन बियावान जंगल में आवाज दब गई। एक-एक कर दरिंदे रिसेप्शनिस्ट की आबरू को तार-तार करते रहे।
विरोध करने पर मारपीट और गाली-गलौज भी की गई। आरोपियों के चेहरे और आवाजें क्लिपिंग में साफ सुनाई दे रही हैं। एक आरोपी कहता है कि क्लिपिंग बनाओ नेट पर अपलोड करेंगे।
बीते दस माह से घुट-घुटकर जी रही थी वह
पीड़िता ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि दरिंदों ने उसे मुंह खोलने पर क्लिपिंग को सार्वजनिक करने की धमकी दी थी। अपने साथ हुई हैवानियत को बताकर वह अपने परिवार की जिंदगी भी दोजख नहीं बनाना चाहती थी।
बीते दस माह से घुट-घुटकर जी रही थी। अब कुछ नहीं बचा तो उसका मकसद आरोपियों को सजा दिलाना है।
पीड़िता का दोस्त आदमपुर निवासी भी शक के घेरे में है। पुलिस की तफ्तीश इस बात पर भी है कि इस कांड में उसका हाथ तो नहीं है।
बसधाड़ा के युवकों का एकसाथ ट्यूबवेल पर मिलना और उसके दोस्त का वहीं पर बाइक रोकना पुलिस को खटक रहा है।
बेटी को दोस्ती के नाम पर छला गया: पिता
पीड़िता के पिता खेतिहर मजदूर हैं। अतिपिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले इस परिवार में पांच-भाई बहन हैं।
युवती सबसे बड़ी है। इंटर करने के बाद उसने घर में हाथ बंटाने के लिए क्लीनिक पर नौकरी की। पिता कहते हैं कि उनकी बेटी को दोस्ती के नाम पर छला गया है।
वहीं बहलाकर बसधाड़ा के जंगल में ले गया था। इस मामले में डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि गैंगरेप क्लिपिंग सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की गई है। पीड़िता को न्याय दिलाया जाएगा। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
युवती के बयानों के मुताबिक घटना के समय उसका दोस्त बेहोश हो गया था। सवाल यह भी है कि उसका दोस्त बेगराजपुर के रेस्टोरेंट में ही खाना खिलाने के बहाने ले जाने के पीछे उसका कोई प्लान तो नहीं था।
आरोपियों के नाम सामने आए तो पुलिस भी कन्फ्यूज हो गई। युवती के दोस्त का भी दूसरे समुदाय से है। गैंगरेप करने वालों में भी बसधाड़ा का एक आरोपी भी उसी नाम का है, जिसके पिता का नाम मोहतम है।
एक और आरोपी है मोनू। मोनू के पिता का नाम मोहसिन है। पुलिस पहले गैंगरेप में दोनों समुदाय के आरोपियों को शामिल होना मान रही थी, लेकिन असलियत का खुलासा हुआ तो नामों का यह कन्फ्यूजन सामने आया।