रविवार को नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने से गुस्साए लालकृष्ण आडवाणी ने मंगलवार शाम भाजपा संसदीय दल का वह फैसला स्वीकार कर लिया, जिसमें उनका इस्तीफा खारिज कर दिया गया था। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने यह जानकारी दी।
आडवाणी के घर हुए एक संवाददाता सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने बताया, 'आडवाणीजी ने सोमवार को तीन पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे संसदीय बोर्ड ने स्वीकार नहीं किया था। आज उन्होंने भाजपा संसदीय दल का फैसला मान लिया।'
आडवाणी ने क्यों दिया इस्तीफाः तीन वजहें
राजनाथ ने कहा, 'आडवाणी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और अगर उनकी कोई शिकायत है तो मैं खुद उनपर गौर करूंगा।'
राजनाथ सिंह ने पत्रकारों को बताया कि इस्तीफे के मुद्दे पर खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने फोन पर लालकृष्ण आडवाणी से बातचीत की थी। आडवाणी ने भागवत की सलाह मानते हुए इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया।
मोदी के फैसले पर यूटर्न नहीं
इससे पहले भाजपा ने साफ किया कि मोदी पर लिया फैसला वापस नहीं होगा। राजस्थान के बांसवाड़ा में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, 'मोदी के फैसले पर यूटर्न नहीं लिया जाएगा। वह चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। भाजपा में एक बार होने के बाद फैसले पलटे नहीं जाते।'