फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी नहीं, चुनावी मिशन की डोर देखेगा कोई और

Sun, 21 Jul 2013 12:09 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली तख्त को लेकर भाजपा के मिशन 2014 के लिए नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की जोड़ी ने भले ही अपनी टीम सामने रख दी हो, लेकिन इस मिशन का ब्लू प्रिंट वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही तैयार कर रहा है।
विज्ञापन


वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में मामूली तौर पर सक्रिय रहे संघ ने इस बार पूरी कमान खुद थाम ली है।

अपने को सांस्कृतिक संगठन कहने वाला संघ इस बार राजनीतिक तौर पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गया है। पिछले नौ साल से दिल्ली के तख्त से बाहर रही भाजपा को संघ हर हालत में सत्ता में लाना चाहता है।

संघ के ‘प्रताप’ से ही मोदी-राजनाथ की यह जोड़ी पार्टी के ‘दादा’ यानी वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को मार्गदर्शक की भूमिका देने में कामयाब हो गई।

अमरावती की बैठक में संघ अपने सभी अनुषांगिक संगठनों विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, आदि को निर्दश दे चुका हैं कि इस बार चुनाव में जुटना होगा।

मोदी के साथ छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले विहिप नेता प्रवीण तोगड़ियो का भी संघ सहयोग करने को कह चुका है। संघ की अमरावती के सम्मेलन के बाद अब साफ हो गया है कि इस बार लोकसभा चुनाव की कमान संघ के हाथ रहेगी।
विज्ञापन


जबकि पिछले चुनाव में पूरी कमान एनडीए के पीएम पद के उम्मीदवार रहे आडवाणी के ही पास थी। हालांकि संगठन के तौर पर चुनाव अभियान का जिम्मा अरुण जेटली के पास था।

बहरहाल, 2009 के चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद से ही संघ ने साफ संकेत दे दिये थे कि पार्टी को नया चेहरा तलाशना होगा।

तब भाजपा ने भी चुनाव नतीजों की समीक्षा में पाया कि आडवाणी को उनकी ज्यादा उम्र के कारण पीएम उम्मीवार के तौर पर उम्मीद के अनुरुप समर्थन नहीं मिला।

चूंकि अटल बिहारी वाजयपी अस्वस्थ थे, इसलिए संघ ने दूसरी कतार के नेताओं को आगे लाना शुरू किया। इसी मकसद से गडकरी को नागपुर से दिल्ली लाया गया।

संघ की इसी रणनीति का नतीजा है कि ही अब आगामी चुनाव में आडवाणी मार्ग दर्शक की भूमिका रहेंगे। जबकि  संघ ने मोदी-राजनाथ के जरिये भाजपा को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें