पूर्वांचल के दस जनपदों में भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ 1996 के लोकसभा चुनाव में तेजी से बढ़ा और उसको 12 में से सात सीट मिली।
इसके बाद चुनाव दर चुनाव सीटें घटती ही चली गईं और 2004 के चुनाव में तो एक भी सीट नसीब नहीं हुई।
हालांकि 2009 में स्थिति सुधरी और दो सीट मिली। इस बार पूर्वांचल के केंद्र बिंदु वाराणसी से भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। उनके असर के बूते पार्टी प्रदर्शन में रिकॉर्ड बनाने को बेताब है।
मौकी भुनाने की रही राजनीति
दिसंबर 1980 में अस्तित्व में आई भाजपा आठवीं लोकसभा के लिए 1984 में हुए चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश से एक भी सीट नहीं पा सकी थी।
इसके बाद पार्टी राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गई। उसने 1989 में वीपी सिंह के जनता दल के साथ दोस्ताना स्पर्धा रखते हुए चुनाव लड़ा और पूर्वांचल की जौनपुर, सैदपुर और राबर्ट्सगंज सीट जीती।
1991 में भी उसको तीन सीट मिली। इसके बाद 6 दिसंबर 1992 में बाबरी विध्वंस कांड का भाजपा ने भरपूर सियासी फायदा उठाया और 1996 में सात सीट पर कब्जा जमा लिया।
नमों की लहर की आस में भाजपा
भाजपा को 1998 में छह और 1999 में चार सीट पर ही संतोष करना पड़ा। 2004 का आम चुनाव भाजपा के लिए बेहद निराशाजनक रहा और यहां की 12 सीटों में से एक भी भाजपा के हिस्से में न आ सकी।
2009 में वाराणसी व आजमगढ़ सीट पर विजय हासिल कर पार्टी ने कुछ हद तक अपनी स्थिति सुधारी। इस बार भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी स्वयं वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं।
ऐसे में राजनीति के जानकार इस ओर नजर गड़ाए बैठे हैं कि चुनाव में नमो फैक्टर पूर्वांचल में क्या गुल खिलाता है?
पूर्वांचल में भाजपा की जीत का आंकड़ा
चुनाव वर्ष...............जीती सीट
2009....................वाराणसी, आजमगढ़
2004....................कोई नहीं
1999....................वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, राबर्ट्सगंज
1998....................वाराणसी, मछलीशहर, सैदपुर, चंदौली, राबर्ट्सगंज, मिर्जापुर
1996....................वाराणसी, मछलीशहर, जौनपुर, सैदपुर, गाजीपुर, चंदौली, राबर्ट्सगंज
1991.....................वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर
1989....................जौनपुर, सैदपुर, राबर्ट्सगंज