काशी के रण में कौमी एकता दल ने कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय का समर्थन कर भाजपा के रणनीतिकारों को बेचैन कर दिया। वाराणसी में नरेंद्र मोदी की जीत पक्की मानकर बैठी भाजपा आसपास की सीटों को लेकर भी फिक्रमंद हो गई है।
मुख्तार अंसारी और अजय राय की दोस्ती के पीछे है ये डील!
माना जा रहा है कि अजय राय और अंसारी भाइयों का गठजोड़ भाजपा को वाराणसी समेत गाजीपुर और बलिया की सीटों पर भी नुकसान पहुंचा सकता है।
दरअसल कौमी एकता दल ने वाराणसी में अजय राय का समर्थन करके पूर्वी उत्तर प्रदेश में भूमिहार वोटरों को लुभाने की कोशिश की है। भूमिहार वोटों में सेंध मारने की कौएद की योजना कामयाब हुई तो गाजीपुर और बलिया में भाजपा की राह मुश्किल हो जाएगी।
भाजपा ने भी निकाला अजय राय का तोड़
कृष्णानंद राय की हत्या के बाद पूर्वीं उत्तर प्रदेश में अजय राय को भूमिहार समुदाय के बड़े नेताओं में गिना जाता है। हालांकि, भाजपा ने भूमिहार वोटरों के भीतर अजय राय के प्रभाव कम करने के लिए कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय को मैदान में उतार दिया है।
मोदी को कितनी महंगी पड़ेगी दो दुश्मनों की दोस्ती
अलका राय कौएद और कांग्रेस के गठजोड़ के खिलाफ प्रचार कर रही हैं। भाजपा ने उन्हें भूमिहार बहुल इलाकों में उतारा है।
अलका राय के पति कृष्णानंद राय और अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या में मुख्तार अंसारी नामजद आरोपी है। कौएद ने जब अजय राय के समर्थन की घोषणी की थी तब उन्होंने कहा था कि मैं इस बात से अचरज में हूं कि कैसे कोई अपने भाई के हत्यारे से समर्थन ले सकता है।
अंसारी बंधुओं की निगाह भूमिहार वोटों पर
राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसारी ने वाराणसी में अजय समर्थन कर भूमिहार वोटों में सेंध लगाने की कोशिश की है।
लोकसभा चुनावों में अफजाल अंसारी बलिया से और मुख्तार अंसारी घोसी से चुनाव लड़ रहे हैं। गाजीपुर से एकता मंच की ओर से डीपी यादव प्रत्याशी हैं।
तीनों ही सीटों पर बड़ी संख्या में भूमिहार वोटर हैं। गाजीपुर से भाजपा ने मनोज सिन्हा को, बलिया से भरत सिंह ओर घोसी से हरिनारायण राजभर को टिकट दिया है। अजय राय के समर्थन के जरिए अंसारी बंधुओं ने इन तीनों सीटों पर भाजपा की राह मुश्किल कर दी है।
अलका राय पर क्यों भरोसा कर रही भाजपा
भाजपा की ओर से प्रचार कर रही अलका राय अजय राय पर हमला करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रही हैं। भूमिहार बहुल इलाकों में वे अक्सर ये कहते हुए सुनी जा सकती हैं कि जो व्यक्ति भाई का नहीं हुआ वह समाज का क्या होगा?
भाजपा अलका की भावनात्मक अपील के जरिए गाजीपुर, बलिया और घोसी में भूमिहार वोटों को अपने खेमें रखना चाह रही है। गाजीपुर, बलिया और घोसी में भूमिहार वोटों की संख्या एक लाख से अधिक है।
गाजीपुर में भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा अलका के पति कृष्णानंद राय के पुराने मित्र हैं।
पिछले चुनाव में हार गए थे अफजाल और मुख्तार
पिछले लोकसभा चुनाव में अफजाल अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर गाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जबकि मुख्तार अंसारी वाराणसी लोकसभा सीट से प्रत्याशी थे। बसपा के समर्थन के बाद भी दोनों भाई हार गए थे। हालांकि दोनो ही सीटों पर विजेता प्रत्याशियों को उन्होंने कांटें की टक्कर दी थी।
वाराणसी में भाजपा प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी महज 17,211 वोटों से ही चुनाव जीत पाए थे। उन्हें 2,03,122 वोट मिले थे, जबकि दूसरे पायदान
पर रहे मुख्तार अंसारी को 1,85,911 वोट मिले थे। अफजाल अंसारी को समाजवादी पार्टी प्रत्याशी राधेमोहन सिंह ने हराया था।