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पढ़िए, यूपी में मिशन 2017 के लिए भाजपा का अगला प्लान

Sun, 30 Nov 2014 01:32 PM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
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उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में अगले छह महीने तक कोई बदलाव नहीं होगा। फिलहाल पार्टी 6 महीने बाद संगठन में आमूलचूल बदलाव की रूपरेखा तैयार करने में जुटी है। पार्टी की योजना मिशन 2017 के तहत पहले चरण में बूथ स्तर पर मजबूत ढांचा खड़ा करने और इसके बाद क्षेत्रवार मजबूत चेहरा तैयार करने की है।
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राज्य के संगठन मंत्री सुनील बंसल बीते दिनों शुरू हुए पार्टी के सदस्यता अभियान के तहत राज्य इकाई को हर हाल में डेढ़ करोड़ सदस्य बनाने और राज्य की सभी 139000 बूथों पर संगठन का मजबूत ढांचा तैयार करने की रणनीति बनाई है। पहले चरण में मजबूत ढांचा खड़ा करने, दूसरे चरण में संगठन में आमूलचूल परिवर्तन के बाद तीसरे चरण में पार्टी अगले साल के अंत तक प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर देगी।

पार्टी ने अभी से सूबे में अपना दल के अतिरिक्त किसी अन्य दल से किसी प्रकार का गठबंधन न करने का फैसला किया है। इसके साथ ही भविष्य में रालोद के भाजपा के साथ आने की संभावना भी खत्म हो गई है।
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फिलहाल लक्ष्मीकांत वाजपेयी बने रहेंगे प्रदेश अध्यक्ष

फिलहाल न तो अध्यक्ष पद से लक्ष्मीकांत वाजपेयी हटाए जाएंगे और न ही संगठन में अगले छह महीने तक कोई छेड़छाड़ होगी। लोकसभा चुनाव के समय से ही संगठन को मजबूत बनाने में जुटे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बेहद विश्वस्त नेता ने बताया कि करीब 6 महीने के बाद राज्य संगठन को नया चेहरा दे दिया जाएगा।

मिशन 2017 के लिए अपनाई गई रणनीति संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि ढांचा खड़ा करने, संगठन को नया लुक देने के बाद प्रत्याशियों का चयन और इसके बाद क्षेत्रवार कद्दावर, युवा और ऊर्जावान चेहरे को उभारा जाएगा। चूंकि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाना पहले से तय है इसलिए पार्टी राज्य में नया चेहरा खड़ा करने के बदले क्षेत्रवार चेहरा खड़ा करने पर जोर दे रही है।

पार्टी अभी से राज्य के जातिगत सियासी समीकरण को साधने के प्रति खासी सतर्क है। चूंकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को अनुसूचित जाति और ओबीसी मतदाताओं का थोक में वोट मिला है, इसलिए प्रत्याशियों के चयन और क्षेत्रवार नेता को उभारने में संबंधित इलाके के जातिगत समीकरणों का खास ख्याल रखेगी।

दरअसल लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार अगड़ी और कुछ पिछड़ी जातियों की राजनीति से इतर दलित और पिछड़ी जाति की भी राजनीति की थी।
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