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शिवसेना को मजबूर कर देगी बीजेपी?

Sat, 18 Oct 2014 12:24 PM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
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विधानसभा चुनाव में शीर्ष स्तर पर तनातनी के बावजूद भाजपा और शिवसेना ने फिर से करीब आने की गुंजाइश बनी हुई है। शिवसेना ने जहां भाजपा पर ताबड़तोड़ हमलों के बावजूद अनंत गीते को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बनाए रखा है, वहीं भाजपा ने भी महाराष्ट्र के मसलन बीएमसी, एनएमसी, पीएमसी में शिवसेना से नाता नहीं तोड़ा है। अपने दम पर सत्ता हासिल करने का दावा कर रही भाजपा जरूरत पड़ने पर शिवसेना से समर्थन मिलने के प्रति आश्वस्त है।
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भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल हो गया तो वह शिवसेना को फिर से साथ लाने के लिए तरसाएगी। अगर स्थिति इसके उलट हुई और भाजपा को सहयोगियों की जरूरत पड़ी तो वह निगमों में नाता तोड़ने का संकेत दे कर शिवसेना को साथ आने के लिए बाध्य करेगी।

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि खासतौर पर बंबई नगरपालिका (बीएमसी) में अपनी सत्ता कायम रखने के लिए शिवसेना फिर से भाजपा का दामन थामने के लिए तैयार हो जाएगी।
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चुनाव नतीजे के बाद लिखी जाएगी दोस्ती की पटकथा

भाजपा के समर्थन के बिना शिवसेना बीएमसी में अपनी सत्ता बरकरार नहीं रख पाएगी। बहरहाल दोनों दलों की ढाई दशक पुरानी दोस्ती के फिर से बहाल होने की पटकथा चुनाव नतीजे आने के बाद ही लिखी जाएगी। वैसे भी अपने मुखपत्र सामना के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे का रुख मतदान के दिन नरम देखा गया, जबकि भाजपा के एक शीर्ष नेता ने यह कह कर शिवसेना से दोस्ती का विकल्प बचा रखने का संकेत दिया कि फिलहाल गीते मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य हैं।

पार्टी के रणनीतिकार का दावा है कि चूंकि राज्य में जमीनी स्तर पर भाजपा की बढ़त महसूस की जा रही है, इसलिए खीज में सामना के संपादकीय में मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई। पार्टी सूत्र जरूरत पड़ने पर मनसे से गठबंधन की संभावना से साफ इनकार कर रहे हैं। इनका कहना है कि चूंकि उत्तर भारत में राज ठाकरे के खिलाफ जबरदस्त माहौल है, इसलिए पार्टी मनसे से नाता नहीं जोड़ेगी।

शिवसेना को बी टीम बनाने की मंशा हुई पूरी
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक महाराष्ट्र में अलग चुनाव लड़ने के बाद पार्टी के सभी उद्देश्य पूरे हो गए हैं। भाजपा अगर यहां सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती है, तो राज्य में शिवसेना को हमेशा छोटे भाई की भूमिका निभानी होगी। चूंकि बीएमसी सहित कई स्थानीय निकायों में शिवसेना और भाजपा की मिलीजुली सत्ता है, इसलिए खासतौर पर शिवसेना बीएमसी में अपनी सत्ता नहीं गंवाना चाहेगी।
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