सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक को कांग्रेस का वोट बैंक विधेयक करार देते हुए भाजपा इसके विरोध में उतर आई है। पार्टी ने केंद्र सरकार को चेताया है कि यह विधेयक देश में गृह युद्ध जैसे हालत पैदा कर सकता है।
भाजपा का मानना है कि पांच राज्यों की विधानसभा व लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने इस विधेयक को संसद में पेश करने का शिगूफा फेंका है। इसलिए पार्टी भी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर आई है।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस की यह चाल भी कामयाब नहीं होगी। क्योंकि अब पूरा देश नरेंद्र मोदी मूड में है। कांग्रेस को वोट बैंक की पेशेवर पार्टी बताते हुए नकवी ने कहा कि यह विधेयक नकारात्मक सोच का परिणाम है, कांग्रेस हर चुनाव से पहले वोट बटोरने के लिए इसी तरह के ‘टोने-टोटके’ करती है।
जैसे कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने धर्म आधारित आरक्षण की बहस शुरू की थी। नकवी ने कहा कि यूपीए सरकार ने 2004 में सत्ता में आने पर पोटा खत्म कर संदेश दिया था कि वह आतंकियों की दोस्त है, उसी तरह अब अपनी विदाई की बेला में सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक लाकर संदेश देना चाहती है कि वह दंगाइयों की दोस्त है।
नकवी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली एनएसी यानी ‘सुपर कैबिनेट’ में शामिल जमीन से कटे लोगों ने इस विधेयक को तैयार किया और अब प्रधानमंत्री समेत कैबिनेट की हिम्मत नहीं है कि इसमें कोई बदलाव कर सके।
उन्होंने कहा कि यह सरकार दंगाइयों की पहचान भी धर्म के आधार पर करना चाहती है। एक समुदाय विशेष को लक्ष्य बनाकर यह विधेयक लाया जा रहा है, लेकिन भाजपा ऐसा होने नहीं देगी।