‘जनाधार वाले नेताओं को भाजपा से इसलिए बाहर जाना होता है, क्योंकि वे चापलूसी नहीं कर पाते। उन्हें चमचागीरी नहीं आती। ...कर्नाटक हो या कोई अन्य राज्य भाजपा को कोई हराता नहीं है बल्कि हम अपने कारणों से हारते हैं।
लोग हमें (भाजपा नेताओं को ) देशभक्त मानते हैं। वह मुझसे वैसे ही आचरण की अपेक्षा करते हैं।
पर, जब देशभक्त होने वाले आचरण के बजाय हम कुर्सी के लिए लड़ते दिखते हैं तो लोग निराश होते हैं और नाराजी में दूसरे विकल्प की तरफ चले जाते हैं।’
उमा के मुंह से निकली इन बातों ने एक बार फिर भाजपा की अंदरूनी हालत की पोल खोल दी है। उमा शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रही थी।
उमा से सवाल हुआ कि कर्नाटक में भाजपा की हार का असली कारण क्या है और इसका दूसरे राज्यों पर क्या असर पड़ेगा? उमा ने कहा कि राज्यों के चुनाव में जीत या हार स्थानीय कारणों से होता है।
यूपी में वर्ष 1992 में ढांचा गिरने के बाद यूपी में चुनाव हुए तो भाजपा हार गई। लोगों ने कहा कि भाजपा का रामजन्मभूमि मुद्दा नहीं चला। पर, ऐसा नहीं था।
यूपी की जातीय जोड़तोड़ (सपा व बसपा के गठबंधन) के कारण भाजपा हारी थी।
उमा से जब यह सवाल हुआ कि कर्नाटक में भाजपा के हारने की स्थानीय परिस्थितियों में क्या येदियुरप्पा भी शामिल हैं, भारती ने जवाब दिया कि बिल्कुल। येदियुरप्पा के खिलाफ कार्रवाई में देरी हुई। इससे हमारा दोहरा नुकसान हुआ।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए सरकार को दांव पर लगाने और येदियुरप्पा की बलि लेने के बावजूद हम जनता के बीच अपनी यह बात ठीक से नहीं रख पाए कि भाजपा ने भ्रष्टाचार से समझौता न करने के सिद्धांत पर कर्नाटक सरकार को दांव पर लगाया है।
पत्रकारों ने उमा से सवाल किया कि भाजपा में कल्याण सिंह, आप (उमा भारती) जैसे तमाम जनाधार वाले नेता बाहर क्यों कर दिए जाते हैं।
उमा ने कहा, ‘मैं खुद को जनाधार वाला नहीं मानती। बस किसी तरह से पांच बार सांसद चुन ली गई।
विधायक भी चुन ली गई। रही बात जनाधार वाले नेताओं के पार्टी से बाहर होने की तो गलती जनाधार वाले नेताओं की भी है। ऐसे नेता अपनी अकड़ में रहते हैं।
सोचते हैं कि मैं क्यों जाऊं किसी की चमचागीरी करने। मैं किसी की कृपा पर तो नेता हूं नहीं जो चापलूसी करूं। इस चक्कर में यह भूल जाते हैं कि राजनीति आज चमचागीरी वाली है।
अपनी राय राजनाथ जी को दे दूंगी
भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार के सवाल पर उमा ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी न बोलने का संकल्प ले रखा है। भाजपा की अपनी व्यवस्था है।
उससे यह तय होगा। रही बात मेरी राय को तो मैं उचित मौके पर अपनी राय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को दे दूंगी।
राहुल पिटे मोहरे
उमा ने कहा कि कर्नाटक जीत के लिए राहुल को श्रेय सच्चाई की तरफ से आंख मूंदना है। राहुल पिटे मोहरे हैं। वह न पिछली बार कांग्रेस का कोई भला कर पाए थे और न इस बार कर पाएंगे। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारेगी।