लोकसभा चुनावों के परिणाम आने में भले ही अभी थोड़ा वक्त है लेकिन इन सबके बीच सियासी गणित साधने की जुगत तेज हो गई है।
जिसतरह से एग्जिट पोल में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को बढ़त के सरकार बनने के आसार नजर आ रहे हैं। ऐसे में कई सियासी दलों ने अपनी रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है।
इसमें सबसे अव्वल वहीं पार्टियां हैं जो एनडीए में पहले रह चुकी हैं। हालांकि बाद में उन्होंने गठबंधन से अपना नाता तोड़ लिया। लेकिन एग्जिट पोल में एनडीए को दिख रही कामयाबी ने इन्हें अपने विचार बदलने को मजबूर कर दिया है।
बीजेडी से मिलेगा सहयोग!
एनडीए के साथ जुड़ने वाली पार्टियों की लिस्ट में एक बड़ा नाम ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल का हो सकता है।
बीजेडी एक समय बीजेपी के सपोर्ट में थी और एनडीए गठबंधन में शामिल थी। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने एनडीए छोड़ दिया था।
लेकिन अब ऐसे संकेत मिले हैं जिससे लग रहा है कि वो एक बार फिर से एनडीए के करीब आ सकते हैं। ये बात उससमय सामने आई जब बीजू जनता दल के एक वरिष्ठ नेता ने केंद्र में एनडीए को सशर्त समर्थन की बात कही।
नवीन पटनायक का क्या होगा रुख?
बीजेडी के मुख्य सचेतक प्रभात त्रिपाठी ने एक समाचार चैनल से बातचीत कहा, "पूरे देश की राय को ध्यान में रखते हुए केंद्र में एनडीए को सशर्त समर्थन देने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।"
बीजेडी नेता ने कहा, "पार्टी एनडीए को तभी समर्थन देगी जब पार्टी ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा करे।"
भले ही बीजेडी की ओर से एनडीए को लेकर सकारात्मक रुख दिखाई दे रहा है। लेकिन एनडीए गठबंधन टूटने के बाद बीजेडी के अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दावा किया था कि उनकी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी से बराबर दूरी बनाए रखेगी।
साथ ही उन्होंने बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की अखिल भारतीय स्वीकार्यता पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि बीजेडी प्रमुख को मनाने के लिए बीजेपी जुट गई है। पार्टी ने राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे को नवीन पटनायक से बात करने का जिम्मा सौंपा है।
एनसीपी के रुख में बदलाव क्यों?
एनडीए के साथ जुड़ने को लेकर बीजेडी के रुख में दिख रहे बदलाव के बीच कई और सियासी दल हैं जो एनडीए के साथ जुड़ने को लेकर विचार कर सकते हैं। इसमें यूपीए गठबंधन में शामिल कई दल भी शामिल हैं।
इसमें एनसीपी का नाम अहम है। ये कयास एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के एक बयान के बाद लगने लगा। एनसीपी नेता ने कहा कि चुनाव में बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरती दिख रही है। साथ ही उन्होंने कहा, "हम यूपीए का हिस्सा रहे हैं, लेकिन असल मुद्दे यह हैं कि इस देश को एक स्थिर सरकार चाहिए।"
पटेल से जब यह पूछा गया कि क्या एनसीपी बीजेपी को समर्थन देगी तो उन्होंने कहा, "इस बारे में कोई अटकलबाजी नहीं की जानी चाहिए।" एनसीपी नेता के बयान से पार्टी के रुख का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल इस मुद्दे पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। असल तस्वीर तो रिजल्ट आने के बाद ही साफ होगी। ऐसे में सभी को इंतजार 16 मई का है।