बसपा सुप्रीमो मायावती राज्यसभा में रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर बहस के दौरान सीबीआई के दुरुपयोग पर भाजपा पर जमकर बरसीं। मायावती ने भाजपा की पोल खोलने के अंदाज में कहा कि उनके खिलाफ ताज कॉरिडोर और आय से अधिक संपत्ति का मामला 2002 में भाजपा नीत सरकार ने ही अपने राजनीतिक साजिश के तहत लगाया था।
बसपा सुप्रीमो ने राज्यसभा में एफडीआई पर यूपीए के समर्थन का ऐलान करते हुए कहा कि वह ना तो सीबीआई से डरती हैं और ना ही कांग्रेस से। सदन में वोट के मामले में उनका फैसला जांच एजेंसी के डर से नहीं, बल्कि सांप्रदायिक ताकतों को जीत से दूर रखने के सिद्धांत पर होता है।
बहस के दौरान मायावती ने कहा कि बुधवार को लोकसभा में एफडीआई पर जवाब के दौरान विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उन पर सीबीआई के भय से वोट से दूर रहने का आरोप लगाया था, जबकि सच्चाई यह है कि उनके खिलाफ सीबीआई का इस्तेमाल भाजपा ने ही पहली बार किया था।
मायावती के इस हमलावर तेवर पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। एफडीआई के बदले सीबीआई पर बोल रहीं मायावती पर अध्यक्ष हामिद अंसारी ने भी कोई आपत्ति नहीं की। मायावती ने बिना रुके कहा कि 2003 में भाजपा नेताओं ने समय से पहले आम चुनाव कराने के मकसद से उनसे राजनीतिक सौदेबाजी की।
भाजपा नेताओं ने उनको दिल्ली बुलाकर कहा था कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा लोकसभा सीटों में अगर 60 सीट वह भाजपा को दे देती हैं तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़ाने में पूरी मदद दी जाएगी। मायावती ने कहा कि वह इसके लिए नहीं मानीं और भाजपा ने उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार से समर्थन वापस ले लिया।