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रिजर्व बैंक ने दिए मौद्रिक रुख में नरमी के संकेत

Thu, 06 Dec 2012 10:49 PM IST
कोलकाता/एजेंसी
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रिजर्व बैंक ने आने वाले दिनों में मौद्रिक स्तर पर कुछ नरमी बरतने के संकेत दिए हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा है कि विकास दर की रफ्तार सुस्त है। केंद्रीय बैंक अपनी आगामी मौद्रिक एवं नीतिगत समीक्षाओं में इसका ध्यान रखेगा। रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक के दौरान सुब्बाराव ने कहा कि विकास दर निश्चित रूप से सुस्त पड़ गई है।
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पिछले दो सालों के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर 8.5 फीसदी और 6.5 फीसदी से गिरकर 5.5 और 5.3 फीसदी पर आ गई है। रिजर्व बैंक सदैव विकास और मुद्रास्फीति में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। पिछली तिमाही में विकास दर का 5.3 फीसदी पर आना एक तेज गिरावट है। सुब्बाराव ने कहा कि ऐसे समय में महंगाई दर भी उच्च स्तर पर बनी हुई है।

यह अपने उच्चतम स्तर पर घटकर फिलहाल 7.5 फीसदी पर आ गई, लेकिन फिर भी यह अधिक है। हमें उम्मीद है कि चालू वित्तवर्ष के आखिर से महंगाई दर में गिरावट आने लगेगी। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक आगामी 18 दिसंबर को मध्य तिमाही और 29 जनवरी को तिमाही समीक्षा पेश करेगा।
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इनमें विकास और महंगाई के संतुलन पर विचार किया जाएगा और उसके अनुसार नीतियां सामने लाई जाएंगी। मुद्रास्फीति के लक्ष्य के लक्ष्य पर दोबारा विचार करने की बाबत सुब्बाराव ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा तय मुद्रास्फीति का लक्ष्य बहुत सख्त या बाध्यकारी नहीं है, लेकिन फिलहाल महंगाई दर को लेकर लक्ष्य पांच फीसदी का है। हाल ही में एक चर्चा के दौरान रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी और सी. रंगराजन ने रिजर्व बैंक को महंगाई दर के लक्ष्य की दोबारा समीक्षा करने की बात कही थी। इस पर सुब्बाराव ने कहा था कि रिजर्व बैंक इस पर विचार करेगा।

दरें नहीं घटाएगा आरबीआई : बार्कलेज
ब्रिटेन के बैंक बार्कलेज ने भारतीय रिजर्व बैंक की 18 दिसंबर को होने वाली ऋण एवं मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में किसी प्रकार की कटौती न होने की संभावना जताई है। बैंक के मुताबिक इसके बाद जनवरी में होने वाली समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की घोषणा हो सकती है। बार्कलेज ने कहा है कि उसे लगता है कि आगामी मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती और खुले बाजार के विकल्पों (ओएमओ) के जरिये अर्थतंत्र में नकदी की कमी को दूर करने का उपाय कर सकता है। रेपो दर, जिसपर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है, में कटौती की कोई संभावना जनवरी के अंतिम सप्ताह से पहले दिखाई नहीं देती। गौरतलब है कि पिछले तीन माह के दौरान आरबीआई ने सीआरआर में आधे फीसदी की कमी करते हुए इसे आठ फीसदी के स्तर पर ला दिया है।
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