लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। आम चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका जवाब 16 मई को ही पता चलेगा। लेकिन चुनावी सर्वे जरूर 'मोदी लहर' की बात कर रहे हैं।
हालिया चुनावी सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में बीजेपी कामयाबी का नया इतिहास रचेगी। उत्तर प्रदेश में भाजपा 41-49 लोकसभा सीटें जीत सकती है। वहीं बिहार में भाजपा के खाते में 22-30 सीटें आने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 और बिहार में 40 सीटें हैं। इन दोनों राज्यों में 10 अप्रैल से 12 मई के बीच छह चरणों में मतदान होगा।
अखिलेश सरकार के खिलाफ गुस्सा
सीएनएन/आईबीएन-सीएसडीएस ने अपने सर्वे में दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी बड़ी ताकत के रूप में सामने आएगी। मुजफ्फरनगर दंगों के बावजूद समाजवादी पार्टी में मुसलमानों का भरोसा लौटने लगा है। सूबे में सपा 11-17 और बसपा 8-14 सीटें जीत सकती है। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के बाद भाजपा को इसका फायदा मिलने जा रहा है।
हालांकि दंगों और अपराध के मामले बढ़ने के बाद अखिलेश सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। 57 फीसदी लोगों ने बताया कि सपा सरकार में क्राइम के मामले बढ़े हैं। वहीं 49 फीसदी ने माना कि इस दौरान प्रदेश में तनाव और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि 49 फीसदी लोग अखिलेश सरकार से संतुष्ट हैं। यूपी में कांग्रेस को बड़ा नुकसान होने जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में 21 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार 5-9 सीटों पर सिमट सकती है।
बिहार में कांग्रेस को झटका, भाजपा को फायदा
वहीं बिहार में कांग्रेस को जोर का झटका लगने वाला है। पार्टी वहां 2-6 सीटों पर खिसक सकती है। बिहार में कांग्रेस ने लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल से चुनावी गठबंधन किया है।
वहां राजद 27, कांग्रेस 12 और एनसीपी 1 सीट पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि सियासी पंडितों का मानना है कि कांग्रेस-राजद के बीच गठबंधन से दोनों पार्टियों को फायदा मिलेगा।
वहीं जनता दल यूनाइटेड से अलगाव के बावजूद बीजेपी को फायदा मिलने वाला है। भाजपा 38 फीसदी वोट पाकर 22-30 सीटें जीत सकती है। बिहार में 41 फीसदी लोग चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें, वहीं 14 प्रतिशत लोग नीतीश के पक्ष में हैं। 58 फीसदी लोगों का कहना है कि मनमोहन सरकार को चुनाव में निराशा हाथ लगेगी।