उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश गंवाने के बाद भाजपा को नये साल में अब झारखंड में भी पार्टी के हाथ से निकला दिख रहा है। झारखंड की साझा सरकार में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने अर्जुन मुंडा सरकार से अलग होने का ऐलान कर दिया दिया है। इससे मुंडा सरकार संकट में घिर गई है। यदि इस विवाद के चलते झारखंड सरकार गिरती है तो भाजपा के लिए यह एक और झटका होगा, जिसकी बिसात लगभग बिछ गई है।
दूसरी ओर भाजपा भी जेएमएम की शर्तों को मानने को तैयार नहीं दिख रही है। पार्टी सरकार की कमान जेएमएम को सौंपने की बजाए चुनाव मैदान में जाने की सोच रही है। हालांकि भाजपा हाईकमान ने पार्टी महासचिव धर्मेंद्र प्रधान को रांची भेजा गया है। पार्टी नेतृत्व स्थिति पर नजर रखे हुए है।
उधर जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन ने कहा कि भाजपा से बातचीत के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं और अब राज्यपाल को मंगलवार को समर्थन वापसी का पत्र दे दिया जाएगा। जेएमएम के 18 विधायक हैं। जेएमएम की मांग है कि पहले से तय शर्त के अनुसार अगले 28 माह के लिए मुख्यमंत्री पद उसे दिया जाए।
अभी मुंडा सरकार में जेएमएम के हेमंत सोरेन उप मुख्यमंत्री है। आगामी 10 जनवरी को मुंडा सरकार के 28 माह पूरे होने जा रहे हैं और इसके बाद जेएमएम अपना मुख्यमंत्री बनाने की मांग करता रही है। हालांकि भाजपा लगातार कहती रही है कि सत्ता की अदला-बदली को लेकर दोनों दलों में कोई समझौता नहीं हुआ था। भाजपा नेतृत्व जेएमएम की शर्तों को मांनने के पक्ष में नहीं है।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि पार्टी झारखंड की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखे हुए है और प्रदेश व वहां के लोगों के हित को ध्यान में रखकर ही फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी नेता अथवा दल के हितों को ध्यान में रखकर फैसला नहीं करेगी। झारखंड विधानसभा में कुछ 81 सीटें हैं, बीजेपी और जेएमएम के पास 18-18 सीटें हैं। समर्थन वापस लिए जाने के बाद अर्जुन मंडा के पास अब 26 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।