मानसून की तुनकमिजाजी के चलते पिछले वर्ष सूखे की चपेट में आए क्षेत्रों के ग्रामीणों को ग्रामीण विकास मंत्रालय की विशेष पेशकश का लाभ मिल रहा है। इन क्षेत्रों में मनरेगा के तहत लोगों को 150 दिन का रोजगार दिया जा रहा है। इन प्रभावित जिलों में महाराष्ट्र और कर्नाटक के ज्यादातर जिले शामिल हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सूखा प्रभावित जिलों में राहत कार्यों के लिए 1900 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृति की थी, जिसमें मनरेगा के तहत 150 दिन का रोजगार भी शामिल है।
मंत्रालय के मुताबिक सूखाग्रस्त क्षेत्रों में बतौर राहत स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता के अलावा मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के लिए लगभग 1900 करोड़ रुपये का योगदान किया है। मंत्रालय ने शुद्ध पेयजल के लिए कर्नाटक को 286.82 करोड़, गुजरात 245.84 करोड़, महाराष्ट्र को 160.70 करोड़, हरियाणा को 115.47 करोड़ और पंजाब को 37.20 करोड़ रुपये दिए हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 150 दिन का रोजगार भी दिया जा रहा है, जो एक वर्ष तक मान्य है। अभी यह योजना महाराष्ट्र और कर्नाटक के सूखा प्रभावित जिलों में चल रही है।
वैसे अभी तक मनरेगा के तहत सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कुल कितने रोजगार प्रदान किए गए इसका ब्योरा मंत्रालय के पास नहीं है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 50 दिन के अतिरिक्त रोजगार से कुल रोजगार दिवस की संख्या में खासा इजाफा होने की उम्मीद है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत कामगारों से ज्यादातर जल संरक्षण, कृषि और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता की योजनाओं के कार्य कराए जा रहे हैं।