दिल्ली में सरकार बनाने के करीब पहुंचने के बावजूद विपक्ष में बैठने को मजबूर भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी को लेकर अपना सियासी ऑपरेशन शुरु कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक आप के बागी विधायक विनोद कुमार बिन्नी समेत पार्टी के कुछ और विधायक भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं।
इनमें कुछ ऐसे विधायक हैं जो राजनीति में खुद को मंत्री बनाए गए कुछ विधायकों की तुलना में वरिष्ठ और अनुभवी मानते हैं और खुद को तरजीह न दिए जाने से खफा हैं। ऐसे असंतुष्ट विधायकों की संख्या चार से पांच तक बताई जा रही है।
नितिन गडकरी से गुपचुप मुलाकात!
यह जानकारी देने वाले सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ विधायक विनोद कुमार बिन्नी की बगावत भाजपा के उस ऑपरेशन की शुरुआत है जिसकी कमान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और दिल्ली के प्रभारी नितिन गडकरी के हाथों में है।
सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल गठन के बाद जब बिन्नी नाराज हुए थे तब देर रात तक उनके घर पर आप नेता संजय सिंह और कुमार विश्वास से हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी थी कि बिन्नी को पूर्वी दिल्ली से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया जाएगा। इसलिए बिन्नी शांत हो गए।
हालांकि इस बीच उनकी एक अनौपचारिक गुप्त मुलाकात नितिन गडकरी से होने की भी चर्चा है।
बिन्नी का धैर्य क्यों टूटा?
मुलाकात में नितिन गडकरी ने बिन्नी को पार्टी में ही रहकर अपनी आवाज उठाने और अपने समर्थक जुटाने की सलाह दी थी।
बताया जाता है कि बिन्नी अभी कुछ दिन चुप रहना चाहते थे, लेकिन अचानक उन्हें पता चला कि पार्टी नेतृत्व जिसमें मुख्य रूप अरविंद केजरीवाल और उनके भरोसेमंद मनीष सिसोदिया, योगेंद्र यादव, संजय सिंह और कुमार विश्वास की कोर टीम ने दिल्ली की ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं, जिसमें पूर्वी दिल्ली की सीट भी शामिल है।
बिन्नी को पता चला कि इसके लिए हाल ही में पार्टी में शामिल हुए पत्रकार आशुतोष का नाम लिया जा रहा है। इसके बाद बिन्नी का धैर्य टूट गया और उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया।
क्या है भाजपा और कांग्रेस की योजना?
सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में आप की सरकार बनने के बाद और देश भर में उसे मिल रहे समर्थन से कांग्रेस से भी ज्यादा बेचैनी भाजपा में है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में आप की लोकप्रियता से खुद भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भी असहज हैं। इसलिए पार्टी रणनीतिकार लोकसभा चुनावों से पहले पहले आम आदमी पार्टी का ग्राफ नीचे उतारने की रणनीति पर काम कर रही है।
योजना है कि फिलहाल आप के असंतुष्ट विधायकों को हवा देकर पहले पार्टी की छवि और टीम केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए जाएं और फिर सही मौका देखकर दिल्ली की सत्ता से उसे बेदखल करके भाजपा सरकार बनाई जाए।
वहीं कांग्रेस की योजना है कि आम आदमी पार्टी को कमजोर होने दो और दिल्ली सरकार को दबाव में लिए रहो लेकिन गिराने का ठीकरा भाजपा के सिर फूटे जिससे लोकसभा चुनावों में उस पर भ्रष्ट राजनीतिक आचरण का आरोप लगाकर हमला किया जा सके।