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वीके सिंह के व्यक्तिगत एजेंडे से भाजपा सरकार नाखुश

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पूर्व सेना प्रमुख और केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की अगले सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से हुई किरकिरी से सरकार बेहद नाराज है।
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सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों का मानना है कि सिंह ने अपने व्यक्तिगत एजेंडे के लिए सरकार की साख की परवाह नहीं की। यही कारण है कि इस मामले में विपक्ष के तीखे हमलों के बाद भी पार्टी की ओर से कोई उनके बचाव में खड़ा नहीं हुआ।

साथ ही सरकार ने भी उनसे दूरी बना ली। कहा जा रहा है कि सिंह के इस व्यक्तिगत एजेंडे से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद खफा हैं। बड़ा विवाद छिड़ने के बाद भी मोदी ने अब तक उनसे बात नहीं की है।
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माना जा रहा है कि पीएम इस मामले में पूर्व सेना प्रमुख को कड़ी फटकार लगा सकते हैं। वैसे सरकार ने इस मामले को विपक्ष की ओर से ठीक से न उठा पाने से राहत की सांस ली है।

सरकार ने ‌नहीं दिया वीके सिंह का साथ

खुद मंत्रियों का मानना है कि इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर अगर विपक्ष पूर्व सेना प्रमुख के खिलाफ सदन में अवमानना का प्रस्ताव लाती तो सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती थी।

भावी सेना प्रमुख को कातिलों और डकैतों का रक्षक बताकर केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह बुरी तरह घिर गए हैं। उनकी इस टिप्पणी ने न केवल सरकार को बल्कि पार्टी को भी नाराज कर दिया है।

नाराजगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस विवाद पर न तो पार्टी सिंह के साथ खड़ी हुई और न ही सरकार ने इसकी जरूरत महसूस की।

एक वरिष्ठ मंत्री ने इस टिप्पणी को सिंह का व्यक्तिगत एजेंडा करार देते हुए कहा कि इस मामले में उन्होंने सरकार की प्रतिष्ठा का भी ख्याल नहीं किया। उक्त मंत्री ने कहा कि यह तो गनीमत है कि लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा नहीं बना पाई।
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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे से हुआ ये सब

चूंकि सत्र के दौरान मंत्री ने सदन के बाहर टिप्पणी की थी और यह टिप्पणी अपनी ही सरकार के अधीन कार्य करने वाले अगले सेना प्रमुख के खिलाफ थी, इसलिए इस मामले में सरकार बुरी तरह घिर सकती थी।

अगर विपक्ष सिंह के खिलाफ अवमानना प्रस्ताव लाती तो सरकार के लिए अपना बचाव करना बेहद मुश्किल हो जाता। सूत्रों का कहना कि मंगलवार की रात जनरल सुहाग के खिलाफ ट्वीट के बाद वीके सिंह को ऊपर से चुप रहने का संदेश दिया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि यह विवाद तब भड़का जब केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बतौर सेना प्रमुख सिंह की सुहाग के खिलाफ कार्रवाई को अवैध और पूर्वनियोजित करार दिया। इससे नाराज सिंह ने बीते मंगलवार को ट्विटर पर सुहाग को कातिलों और डकैतों का रक्षक बताते हुए अपनी कार्रवाई को उचित करार दिया।
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