अब तक तय समय से पहले लोकसभा चुनाव होने का राग अलाप रही भाजपा के सुर बदलने लगे हैं।
अर्थव्यवस्था की बदहाली को देखते हुए भाजपा को अब समय से पहले लोकसभा चुनाव होने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
पार्टी यह भी मानने लगी है कि जिस खाद्य सुरक्षा कानून के सहारे कांग्रेस तीसरी बार सत्ता में लौटने का सपना पाल रही है, उस पर अमल करने के लिए भी सरकार को समय चाहिए।
इसलिए अब भाजपा अब लोकसभा की बजाए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने जा रही है। पार्टी इन चुनावों को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान रही है।
भाजपा का आकलन है कि अर्थव्यवस्था में उठे मौजूदा बवंडर से कांग्रेस बेहद डरी है और ऐसे हालात में चुनावी महासमर में कूदने का जोखिम नहीं उठाएगी।
हालांकि मिशन 2014 की तैयारी में जुटी भाजपा सत्ता में लौटने के लिए मौजूदा हालात को अपने लिए सबसे बेहतर मौका मान रही है।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि भ्रष्टाचार व घोटालों से घिरी सरकार अब अर्थव्यवस्था के संकट से जूझ रही है। इसलिए सरकार लोकसभा चुनाव में जाने से बचेगी। जबकि सपा और बसपा अपने-अपने हितों के लिए इस सरकार को जिंदा रखेंगे।
भाजपा का यह भी मानना है कि संसद की मुहर लग जाने के बाद जल्दी ही खाद्य सुरक्षा कानून बन जाएगा, लेकिन उस पर अमल कराने के लिए भी सरकार को समय चाहिए।
हालांकि संकट से घिरी अर्थव्यवस्था के चलते भाजपा को इस कानून पर एक साथ पूरे देश में अमल होने को लेकर शंका है। इसलिए भी सरकार अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के बाद ही इस योजना के लिए खजाना खोल पाएगी।
बहरहाल, नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए अभियान समिति की कमान सौंप चुकी भाजपा ने अब राज्यों के विधानसभा चुनावों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है।
पांच में से भाजपा को चार राज्यों में बड़ी उम्मीदें हैं। मिजोरम को छोड़ मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस से ही है।