पार्टी के हुक्म पर तमाम नाकेबंदियों को तोड़ते हुए कांठ में हिंदू महापंचायत में पहुंचे। पुलिस की लाठियां खाईं, लॉकअप में जूतों से पीटा गया, हदें पार करते हुए पुलिस ने पेशाब तक पिलाया। लेकिन पार्टी के वफादार सिपाही की तरह भाजपा के कार्यकर्ता ये सब सहते रहे। जेल में 82 दिन कैद रहे।
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लेकिन यकीन था पार्टी साथ खड़ी है इस वफा का सिला भी मिलेगा। लेकिन कांठ प्रकरण में पहले दिन से ही फजीहत झेल रही भाजपा ने अब इन कार्यकर्ताओं को तन्हा छोड़ दिया है।
कांठ बवाल के मुकदमों के चलते पार्टी ने परोक्ष रूप से इन्हें अपराधी घोषित करते हुए दूरी बना ली है। यही वजह है कि रविवार को अमरोहा में होने जा रहा इन कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह टाल दिया गया। भाजपा के कदम ने कार्यकर्ताओं के कलेजे को चीर दिया है जो बाहर आने के बाद वफा के बदले सम्मान की उम्मीद लगाए बैठे थे।
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रातोंरात बैकफुट पर आई भाजपा
कांठ प्रकरण में दो माह तक जेल में बंद रहने वाले 60 भाजपाइयों का सम्मान करने के मामले में पार्टी रातोंरात बैकफुट पर आ गई। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर उसने हाथ खींच लिए। समारोह में प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी शिरकत करनी थी लेकिन रात में ही पूरे कार्यक्रम में ही फेरबदल कर दिया गया। जुलाई में मुरादाबाद जनपद की कांठ तहसील के गांव अकबरपुर चैदरी में मंदिर से पुलिस प्रशासन द्वारा जबरन लाउडस्पीकर उतारने पर बवाल हो गया था। पुलिस ने मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल और बिजनौर जनपद के 60 भाजपाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
करीब दो माह बाद कोर्ट से जमानत मिलने पर पिछले दिनों सभी रिहा हुए हैं। जेल से रिहा हुए भाजपाइयों के स्वागत की योजना थी। एकाएक पांच अक्तूबर को शिवानी बैंक्वेट हाल में सम्मान समारोह की घोषणा कर दी गई। समारोह की तैयारी मुकम्मल कर ली गईं और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का आना भी तय हो गया था। लेकिन रातोंरात भाजपा बैकफुट पर आ गई और सम्मान समारोह से हाथ खींच लिए।
भाजपाइयों की मानें तो करनाल में होने वाले चुनाव के चलते कार्यक्रम स्थगित किया गया है। सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने नाराजगी व्यक्त की है और प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखा है। जिसके बाद कार्यक्रम से हाथ खींच लिए गए हैं।
भाजपा ने पहली बार नहीं लिया यू टर्न
कांठ बवाल में भाजपा के यू टर्न का यह पहला मौका नहीं है। कांठ के गांव अकबरपुर चैदरी में शिव मंदिर से लाउडस्पीकर उतारे जाने के खिलाफ चार जुलाई को कांठ में भाजपा ने ही हिंदू महापंचायत कॉल की थी। बाकायदा पश्चिमी यूपी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने 28 जून को इसका ऐलान किया था। प्रदेश अध्यक्ष इसमें मुख्य अतिथि थे। लेकिन जब कांठ में बवाल हुआ और डीएम की आंख फूटी तो प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी साफ मुकर गए। कह दिया भाजपा ने महापंचायत बुलाई ही नहीं थी।
इसके बाद मुरादाबाद पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष ने खुद को नागिन तक कह डाला और ऐलान किया एसएसपी धर्मवीर यादव से नागिन की तरह बदला लेकर रहेंगे। 15 जुलाई से कमिश्नरी के घेराव का ऐलान किया, लेकिन जब पुलिस ने धमकाया तो भाजपा के इस कार्यक्रम की भी हवा निकल गई। इस पर डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा था, धरना प्रदर्शन आंदोलन तो स्थानीय यूनिट को करने होते हैं मैं तो ऐलान करता हूं।
इसके बाद फिर 26 जुलाई को कांठ थाने में वेस्ट यूपी के सभी सांसद कॉल कर लिए गए। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष खुद थाने नहीं पहुंचे, डीएम आवास पर एसएसपी के खिलाफ तहरीर दी और भाषण देकर निकल गए। खास बात ये है कि भाजपा ने आज तक पलटकर नहीं पूछा कि उन्होंने जो तहरीर दी थी उस पर एक्शन क्या हुआ, एफआईआर क्यों नहीं हुई?
हमारे कार्यकर्ता अभी जेल से जमानत पर छूटे हैं, उन्हें बरी नहीं किया गया है। ऐसे में सम्मान समारोह करना उचित नहीं था। प्रदेश अध्यक्ष ने खुद कार्यक्रम नहीं करने के आदेश दिए थे। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष के आने की बात गलत थी। इस तरह के आयोजन की कोई अनुमति पार्टी से नहीं ली गई थी, हमसे भी सलाह नहीं ली गई। जिलाध्यक्ष गिरीश त्यागी, पूर्व सांसद चेतन चौहान और सुरेश नागर कार्यक्रम कराना चाहते थे। हम स्पष्ट कर दें कि चेतन चौहान और सुरेश राणा के पास पार्टी का कोई औपचारिक पद नहीं है। -कंवर सिंह तंवर, सांसद, अमरोहा।
कांठ बवाल में जेल से रिहा हुए कार्यकर्ताओं के सम्मान और स्वागत के लिए भाजपा और आर्य समाज की ओर से एक संयुक्त कार्यक्रम अमरोहा में रखा गया था। इसमें मुझे भी आना था। लेकिन बीती रात मुझे पार्टी कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व ने कार्र्यक्रम को स्थगित कर दिया है। लिहाजा मैं नहीं आया। कार्यक्रम को स्थगित करने की वजह मुझे नहीं पता है। -चेतन चौहान, पूर्व सांसद।
कांठ बवाल में हमारे निर्दोष कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया, यह सभी जानते हैं। मेरी नजर में स्वागत करने में कोई गलत बात नहीं है। जब एक कार्यक्रम घोषित किया गया था तो उसे किया जाना चाहिए था। हालांकि मुझे इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया था। लेकिन मैं मानता हूं कि इस तरह बैकफुट पर आने से पार्टी की छवि कमजोर होती है और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है।-कुंवर सर्वेश सिंह, सांसद, मुरादाबाद।
मुझे पार्टी ने विधानसभा चुनाव में हरियाणा भेज रखा है। लिहाजा मुझे कार्यक्रम की जानकारी नहीं है। लेकिन हमारा ये स्पष्ट मत है कि कांठ बवाल में जेल गए हमारे एक - एक बेगुनाह कार्यकर्ता के साथ पार्टी पूरी ताकत से खड़ी है। प्रदेश सरकार के दबाव में निर्दोष कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने जुल्म किए। - एडवोकेट सत्यपाल सैनी, सांसद, संभल।
कांठ बवाल में जेल से छूटे कार्यकर्ताओं के स्वागत सम्मान की कोई योजना भाजपा की नहीं थी। यदि कोई सामाजिक संगठन इस तरह का प्रोग्राम करता है तो पार्टी को कोई एतराज नहीं है। - भूपेंद्र सिंह, अध्यक्ष पश्चिमी यूपी, भाजपा।