चीन के नए प्रधानमंत्री ली केचियांग के पहले भारत दौरे में दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य एजेंडा आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।
मगर भाजपा चाहती है कि सरकार चीन के समक्ष घुसपैठ और पाकिस्तान को सैन्य सहायता दिए जाने के मामले में प्रमुखता से अपना विरोध दर्ज कराए।
पार्टी का मानना है कि चीनी सैनिकों के बार-बार घुसपैठ के कारण दोनों देशों के बीच परस्पर अविश्वास की खाई चौड़ी होती गई है।
इसके अलावा पाकिस्तान चीन की सैन्य सहायता का उपयोग भारत में आतंकवाद का बीज बोने के लिए करता है।
भाजपा नेता तरुण विजय ने कहा कि पार्टी चाहती है कि भारत बार-बार हो रही घुसपैठ और पाकिस्तान को सैन्य सहायता का मसला प्रमुखता और पूरी ताकत से उठाए।
जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को परस्पर बातचीत से हल करने पर समझौता है, तब लद्दाख में घुसपैठ जैसी घटना ने दोनों देशों के संबंधों पर चोट पहुंचाई है।
सरकार को चाहिए कि वह चीनी प्रधानमंत्री से घुसपैठ की उकसाने वाली कार्रवाई पर स्थायी विराम लगाने की बात करे। जिससे यह संदेश जाए कि इस मामले में भारत का रुख नरम नहीं है।
तरुण विजय ने कहा कि इसके अलावा पाकिस्तान को चीन की सैन्य सहायता भी भारतीय हितों के खिलाफ है।
पाकिस्तान इस सैन्य सहायता का उपयोग भारतीय हितों के खिलाफ आतंकवादी संगठनों को मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल करता आया है।
इसलिए भारत को चाहिए कि इस मामले को भी वह चीनी प्रधानमंत्री के समक्ष मजबूती से उठाए। तरुण विजय ने हालांकि चीन के प्रधानमंत्री के भारत दौरे का स्वागत भी किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद विदेश दौरे के रूप में सबसे पहले भारत को चुनकर चीन ने भारत से संबंध सुधारने की दिशा में सकारात्मक संदेश दिए हैं।
हालांकि यह तब सफल होगा जब चीन भारतीय सीमा में घुसपैठ जैसी कार्रवाईयों पर स्थायी रोक लगाएगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन एक बड़ी समस्या है।
हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन इसका ज्यादा लाभ चीन ले रहा है। ऐसे में भारत को चाहिए कि वह चीन के प्रधानमंत्री के समक्ष वहां के बाजार में भारत को पैठ बढ़ाने का अवसर देने की बात भी मजबूती से रखे।