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मोदी बने नए पीएम-इन-वेटिंग, आडवाणी फिर खफा

Sat, 14 Sep 2013 01:30 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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जिस लालकृष्ण आडवाणी ने दशकों के संघर्ष के बाद पार्टी को खड़ा किया था उन्हीं की अनुपस्थिति में भाजपा ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए पीएम पद का दावेदार घोषित कर दिया।
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पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में संसदीय दल की एक बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसकी घोषणा की। जब ये घोषणा की गई तो एकता दिखाने के लिए मंच पर सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी, अरुण जेटली से लेकर नितिन गडकरी तक सभी नेता मौजूद थे।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत के दबाव में आखिर में पार्टी के उन सभी नेताओं को मोदी के नाम पर सहमत हो जाना पड़ा, जो शुरुआती दौर में मोदी के ख़िलाफ़ थे। लेकिन पूरी पार्टी और संघ के वरिष्ठ नेता भी मिलकर भी आडवाणी को नहीं मना सके। चुनिंदा दलों वाले एनडीए के नेताओं ने भी आखिरकार नरेंद्र मोदी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।
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इस घोषणा के साथ भाजपा से स्पष्ट कर दिया है कि वह 2014 के चुनावों में एक बार फिर हिंदुत्व के एजेंडे के साथ मैदान में उतरना चाहती है और इसके लिए वह 2002 के गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी पर लगाए जाने वाले आरोपों को अनदेखा भी कर सकती है।

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दरअसल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबाव और पार्टी कार्यकर्ताओं की डिमांड लंबे वक्त से नरेंद्र मोदी को पीएम पद का दावेदार बनाने के पक्ष में थी। आज इसी डिमांड की चली। भगवा दल ने कहा 'अंत भला, सो सब भला।'

वक्त बदला, तो बदला मिजाज
इस फैसले से पार्टी के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी का विरोध छिपा नहीं था, लेकिन शाम गुलाबी होते-होते मिजाज बदले, मन बदले और फैसला हो गया। और भाजपा ने कहा 'नमो-नमो।'

शुक्रवार शाम पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में यह अहम फैसला हुआ। लेकिन इससे पहले दिन भर जो मैच खेल गया, वह भारत-पाकिस्तान के किसी वनडे से कम नहीं था।

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दिन निकलते ही मुलाकातों का दौर शुरू हो गया था। अनंत कुमार, सुषमा स्वराज से मिलने पहुंचे। आडवाणी से मिलने नितिन गडकरी और मुरली मनोहर जोशी पहुंचे।

सवेरे बीजेपी प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने साफ कर दिया था कि यह महज औपचारिकता है, क्योंकि ज्यादातर सदस्य मोदी के पक्ष में हैं।

दिन भर चली आडवाणी को मनाने की कोशिश
लेकिन आडवाणी का पारा दिन में भी चढ़ा रहा और उन्हें मनाने की कोशिश जारी रही। दोपहर में सुषमा स्वराज, अनंत कुमार और नितिन गडकरी दोबारा आडवाणी के घर गए।

आडवाणी से मुलाकात के बाद गडकरी वहां से सुषमा स्वराज के घर पहुंचे। सुषमा को आज अंबाला जाना था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिल्ली में रहने का फैसला किया। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिलने पहुंचे रविशंकर प्रसाद।

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दोपहर गुजरी, तो ड्रामा दिलचस्प होता चला गया। सवेरे कहा जा रहा था कि मोदी इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। लेकिन यह प्रोग्राम भी बदला। मोदी ने तीन बजे की फ्लाइट पकड़ी और शाम पांच बजे दिल्ली पहुंच गए।

मोदी का रास्ता साफ, चुनौती सामने
आडवाणी और उनके कैंप के दूसरे सदस्यों के विरोध और दलीलों की दरकिनार करते हुए राजनाथ सिंह ने वही किया, जो संघ ने उन्हें पढ़ाया था। अब तक आंतरिक विरोधों से परेशान रहे मोदी का रास्ता साफ कर दिया गया है।

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लेकिन उनकी चुनौती खत्म नहीं, शुरू हुई है। अब उन्हें असल विरोधियों से भिड़ना है। मोदी को भाजपा ने फिल्म रिलीज होने से पहले हीरो बना दिया है और अब इस फिल्म को हिट होना ही होगा।

अगर ऐसा हुआ, तो मोदी हीरो से सुपरहीरो बन जाएंगे। लेकिन अगर यह फिल्म पिटी, तो मोदी को फ्लॉप होने से कोई नहीं बचा पाएगा। विरोधी तो विरोधी, उनके अपने भी उन्हें धोने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। बिसात बिछ चुकी है और खेल दिलचस्प है।
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