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तो मिट जाएगी भाजपा-शिवसेना के बीच की दूरी

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विधानसभा चुनाव की कड़वाहट को भूल शिवसेना और भाजपा नजदीक आती दिख रही हैं। बुधवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नरम रुख के बाद भाजपा ने यह कह कर अपने रुख में नरमी का संकेत किया कि उसने शिवसेना के लिए दरवाजा बंद नहीं किया है।
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भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि शिवसेना खुद साथ छोड़ कर गई, जबकि उसके कोटे के मंत्री अनंत गीते अब भी सरकार में हैं। दरअसल, एग्जिट पोल में भाजपा के अपने दम पर सरकार बनाने या बहुमत के करीब रहने वहीं शिवसेना के दूसरी बड़ी ताकत बनने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

भाजपा को लगता है कि दूसरी बड़ी ताकत बनने के बावजूद शिवसेना की इज्जत तो बचेगी, मगर उसकी पुरानी हैसियत बरकरार नहीं रहेगी। ऐसे में भाजपा शिवसेना को अपनी शर्तों पर राजग में शामिल करने का दांव चलेगी।
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तो शिवसेना को होगा नुकसान

वैसे भी भाजपा का आकलन है कि चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना उससे अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहेगी। अगर शिवसेना ने ऐसा किया तो बीएमसी सहित कई निकायों में उसे अपनी सत्ता से हाथ धोना होगा।

इन निकायों में शिवसेना की सत्ता भाजपा के रहमोकरम पर टिकी है। उल्लेखनीय है कि तनातनी के बावजूद न तो प्रधानमंत्री ने गीते को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के लिए कहा और न ही शिवसेना ने ही गीते से इस्तीफा दिलवाया।

इसे देखते हुए पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि चुनाव बाद के समीकरणों को देखते हुए दोनों दल फिर साथ हो सकते हैं। हालांकि, भाजपा सूत्रों का कहना है कि अगर उसे अपने दम पर बहुमत मिला तो पार्टी शिवसेना से मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी का पूरा हिसाब लेगी। पार्टी इस संबंध में शिवसेना के सामने खेद जताने की शर्त भी रख सकती है।
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