दिल्ली के अखबारों के पहले पन्ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किरण बेदी का मुस्कुराता चेहरा आम आदमी पार्टी को रास नहीं आया। दिल्ली में चुनाव प्रचार का शोर गुरुवार को ही थम गया, इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को सभी अखबारों के पहले पन्ने पर केंद्र सरकार की आठ महीनों की उपलब्धियों का बखान किया।
विज्ञापन में मोदी सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के लिए वोट मांगा गया। आम आदमी पार्टी ने विज्ञापन का विरोध किया और कहा कि मामले को चुनाव आयोग के सामने उठाएगी। आप नेता अशुतोष ने ट्विटर पर कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त हो जाने के बाद भी ऐसा विज्ञापन देना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हैं।
आशुतोष ने पूछा कि सभी अखबारों में विज्ञापन देने के लिए बीजेपी के पास पैसा कहां से आया? ये विज्ञापन बहुत ही महंगे हैं। आशुतोष ने एक सवाल और उठाया कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद ऐेसे विज्ञापन टीवी में नहीं दिए जा सकते, फिर अखबार में अनुमति कैसे? कानून को बदला जाए।
जन प्रतिनिधि कानून की कमजोरी का उठाया फायदा
दरअसल भाजपा ने एक कानून की कमजोरी का फायदा उठाकर चुनाव से ऐन पहले ऐसा विज्ञापन दिया। और ऐसा नहीं की भाजपा ने ही यह किया हो, कई अन्य पार्टियां भी कानून की कमजोरी का फायदा उठाकर अखबारों में विज्ञापन देती रही हैं। शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के समर्थन में राजस्थान की नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी ने भी विज्ञापन दिया है।
जन प्रतिनिधि कानून, 1951 के अनुच्छेद 126 के मुताबिक मतदान पूर्ण होने के 48 घंटे से पहले चुनाव प्रचार समाप्त हो जाता है, अर्थात मतदान यदि 7 फरवरी की शाम 6 बजे समाप्त होना है तो प्रचार 5 फरवरी की शाम 6 बजे समाप्त हो जाएगा।
इस कानून के मुताबिक चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अगले 48 घंटे तक कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनावी क्षेत्र में सिनेकैमरा, टीवी या ऐसे ही अन्य माध्यमों से जनता को चुनाव सामग्री नहीं दिखा सकता।
कानून में क्यों रही गई ये कमजोरी किसी को पता नहीं
अनुच्छेद 126 के उपअनुच्छेद एक के मुताबिक कोई भी कानून का उल्लंघन करता है तो उसे जुर्माना या अधिकतम दो वर्ष की सजा अथवा दोनों दिया जा सकता है। इस कानून में चुनाव सामग्री का मतलब ऐसी किसी भी साम्रगी से है जो चुनाव के नतीजे को प्रभावित कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि इस कानून इलेक्ट्रानिक माध्यमों का जिक्र तो है लेकिन प्रिंट माध्यम का जिक्र नहीं है। कानून से प्रिंट को क्यों बाहर रखा गया ये आज तक स्पष्ट नहीं हो सका। पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी से भी यही सवाल एक बार पूछा गया लेकिन वे कारण स्पष्ट नहीं कर पाए। शुक्रवार को आप नेता अशुतोष ने कानून की इस कमजोरी का उल्लेख करते हुए ही कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद टीवी में विज्ञापन नहीं दिए जा सकते तो अखबार में अनुमति क्यों दी जा रही है?
आशुतोष ने भाजपा द्वारा दिए गए विज्ञापनों के खर्च का सवाल भी उठाया है। एक वेबसाइट के आकलन के मुताबिक दिल्ली के नौ बड़े अखबारों में ऐसा विज्ञापन देने में 5 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकते हैं।
शनिवार को भी भाजपा दे सकती है पहले पन्ने पर विज्ञापन
भाजपा ने जो विज्ञापन दिया है, वह पहले पन्ने पर छपा है, जिसे जैकेट एड कहा जाता है। अखबारों में जैकेट एड की कीमत सबसे ज्यादा होती है। भाजपा ने अपने विज्ञापन सर्कुलेशन के लिहाज से अंग्रेजी और हिंदी के सभी बड़े अखबारों में दिया।
फ्रंट पेज विज्ञापन के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक चिट्ठी भी तीसरे पन्ने पर क्वार्टर पेज विज्ञापन के रूप में छपी है। विज्ञापनों की बुकिंग करने वाली रिलीजमाइएड डॉट कॉम नाम एक वेबासाइट ने स्क्रॉल डॉट इन को बताया कि दिल्ली के 9 बड़े अखबारों मे जैकैट ऐड देने में लगभग 5 करोड़ खर्च होगा।
लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मतदान दिन (10 अप्रैल, 2014) भी विज्ञापन दिया था, इस लिहाज से ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा शनिवार को भी अखबारों के पहले पन्ने पर विज्ञापन दे सकती है।
(ऊपर दिया गया विज्ञापन बीजेपी ने पिछले साल 10 अप्रैल को दिल्ली के अखबारों को दिया था। उसी दिन दिल्ली में लोकसभा के लिए मतदान हुआ था।)