आरक्षित रेल टिकटों की कालाबाजारी रोकने को रेलवे अब बायोमेट्रिक सिस्टम की मदद लेगा। इसके लिए सभी आरक्षण केंद्रों पर बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया जा रहा है। टिकट खरीदने से पहले यात्री को इस मशीन पर अपनी उंगलियों के निशान देने होंगे।
दुबारा टिकट खरीदते समय इस मशीन पर उंगली लगाते ही यह पता चल जाएगा कि संबंधित व्यक्ति इससे पहले वहां टिकट खरीदने आ चुका है। यदि तय समय सीमा से पहले कोई व्यक्ति दुबारा टिकट खरीदने पहुंचेगा तो उसे काउंटर से वापस लौटा दिया जाएगा। इस तरह दलालों को दिन में लगातार विभिन्न ट्रेनों के लिए टिकट खरीदने से रोका जा सकेगा।
पश्चिमी रेलवे के महाप्रबंधक महेश कुमार ने बताया कि भोपाल में कुछ समय पहले प्रायोगिक तौर पर यह योजना शुरू की गई है। अगले महीने तक मुंबई में भी कुछ आरक्षण केंद्रों पर बायोमेट्रिक मशीनें लगा दी जाएंगी। यदि इस सिस्टम से दलालों को रोक पाने में सफलता मिली तो रेलवे बोर्ड दूसरे शहरों में भी यह सिस्टम लगाने की अनुमति दे सकता है।
महेश कुमार के अनुसार बायोमेट्रिक सिस्टम से तत्काल टिकटों की कालाबाजारी पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा। उन्होंने बताया कि बड़े शहरों में एक से अधिक आरक्षण केंद्र होने के कारण सभी केंद्रों पर लगने वाले बायोमोट्रिक सिस्टम को एक सर्वर से जोड़ा जाएगा। इससे कोई व्यक्ति यदि शहर के किसी भी आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदता है तो उसकी सूचना सर्वर में दर्ज रहेगी। दुबारा उसके आरक्षण केंद्र पहुंचने पर बायोमेट्रिक सिस्टम उंगलियों के निशान को पहचान लेगा।
महेश कुमार ने बताया कि अभी अंतिम रूप से यह तय नहीं किया गया है कि एक बार टिकट खरीदने पर कितने घंटे के लिए दुबारा टिकट खरीदने पर रोक होगी। भोपाल में अभी चार घंटे की रोक है। मुंबई के मामले में अभी फैसला नहीं हुआ है।