बिहार में जदयू के अंदर जारी मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सियासी जंग दिल्ली पहुंच गई है। जदयू विधायक दल के नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में 130 समर्थक विधायक मंगलवार रात दो अलग-अलग विमानों से राजधानी पहुंचे। राज्य में सरकार बनाने का जल्द आमंत्रण दिए जाने के लिए राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी पर दबाव बनाने के लिए नीतीश जदयू, कांग्रेस, भाकपा और निर्दलीय विधायकों की बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सामने परेड कराएंगे। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति से वक्त मांगा है लेकिन राष्ट्रपति भवन के सूत्रों का कहना है कि मुखर्जी इस पर बुधवार को ही कोई निर्णय लेंगे।
पटना हवाई अड्डे पर मंगलवार शाम दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश ने कहा कि राज्यपाल के सरकार गठन के लिए बुलाने में देरी के चलते उन्हें विधायकों के साथ राजधानी जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के हमारे दावे के 24 घंटे बाद भी राज्यपाल की ओर से अभी भी कोई संदेश नहीं आया है। बहुमत हमारे पक्ष में है और इस बारे में राष्ट्रपति को जानकारी देंगे। हम बुधवार को 2:15 बजे अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात का प्रयास करेंगे। जदयू नेता ने कहा कि राज्य में खरीद फरोख्त को बढ़ावा दिया जा रहा है। मांझी खेमा जदयू विधायकों को मंत्री पद और विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट देने का प्रलोभन दे रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल मांझी को बहुमत साबित करने का मौका देते हैं तो हम मुख्य विपक्षी दल का दावा पेश करेंगे। वहीं दूसरी ओर मंगलवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने कैबिनेट की बैठक ली। राज्य की मांझी कैबिनेट के सदस्यों की संख्या घटकर मात्र 9 रह गई है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि इसके चलते उन्हें 18 महत्वपूर्ण विभागों का काम देखना पड़ रहा है। इससे पहले उनके पास 9 विभाग थे। मांझी इस वक्त गृह, वित्त, कैबिनेट सचिवालय, सामान्य प्रशासन, सर्विलांस, चुनाव, ऊर्जा, एससी/एसटी कल्याण, सूचना और सार्वजनिक संबंध, आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर, भवन और निर्माण, जल संसाधन, पर्यावरण और वन, स्वास्थ्य, गन्ना उद्योग जैसे विभाग देख रहे हैं।
गौरतलब है कि मांझी कैबिनेट में शामिल नीतीश समर्थक 20 मंत्रियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया था। साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को भी राज्यपाल ने खारिज कर दिया था।