फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली पहुंची नीतीश-मांझी की सियासी जंग

Wed, 11 Feb 2015 03:33 PM IST
एजेंसी, ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली, पटना
विज्ञापन
विज्ञापन
बिहार में जदयू के अंदर जारी मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सियासी जंग दिल्ली पहुंच गई है। जदयू विधायक दल के नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में 130 समर्थक विधायक मंगलवार रात दो अलग-अलग विमानों से राजधानी पहुंचे। राज्य में सरकार बनाने का जल्द आमंत्रण दिए जाने के लिए राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी पर दबाव बनाने के लिए नीतीश जदयू, कांग्रेस, भाकपा और निर्दलीय विधायकों की बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सामने परेड कराएंगे। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति से वक्त मांगा है लेकिन राष्ट्रपति भवन के सूत्रों का कहना है कि मुखर्जी इस पर बुधवार को ही कोई निर्णय लेंगे।
विज्ञापन


पटना हवाई अड्डे पर मंगलवार शाम दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश ने कहा कि राज्यपाल के सरकार गठन के लिए बुलाने में देरी के चलते उन्हें विधायकों के साथ राजधानी जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के हमारे दावे के 24 घंटे बाद भी राज्यपाल की ओर से अभी भी कोई संदेश नहीं आया है। बहुमत हमारे पक्ष में है और इस बारे में राष्ट्रपति को जानकारी देंगे। हम बुधवार को 2:15 बजे अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात का प्रयास करेंगे। जदयू नेता ने कहा कि राज्य में खरीद फरोख्त को बढ़ावा दिया जा रहा है। मांझी खेमा जदयू विधायकों को मंत्री पद और विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट देने का प्रलोभन दे रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल मांझी को बहुमत साबित करने का मौका देते हैं तो हम मुख्य विपक्षी दल का दावा पेश करेंगे। वहीं दूसरी ओर मंगलवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने कैबिनेट की बैठक ली। राज्य की मांझी कैबिनेट के सदस्यों की संख्या घटकर मात्र 9 रह गई है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि इसके चलते उन्हें 18 महत्वपूर्ण विभागों का काम देखना पड़ रहा है। इससे पहले उनके पास 9 विभाग थे। मांझी इस वक्त गृह, वित्त, कैबिनेट सचिवालय, सामान्य प्रशासन, सर्विलांस, चुनाव, ऊर्जा, एससी/एसटी कल्याण, सूचना और सार्वजनिक संबंध, आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर, भवन और निर्माण, जल संसाधन, पर्यावरण और वन, स्वास्थ्य, गन्ना उद्योग जैसे विभाग देख रहे हैं।
विज्ञापन


गौरतलब है कि मांझी कैबिनेट में शामिल नीतीश समर्थक 20 मंत्रियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया था। साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को भी राज्यपाल ने खारिज कर दिया था।
Trending Videos

अब माझी ने खेला आरक्षण कार्ड

मुख्यमंत्री जीतनराम माझी ने आखिरकार अपना आरक्षण कार्ड खेल दिया है। बगावत के बाद मंगलवार को बुलायी गयी पहली कैबिनेट की बैठक में ठेके में आरक्षण समेत कुल 21 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी। राज्य सचिवालय में हुई इस बैठक में सडक ठेके में अनुसूचित जाति व जनजातियों को टेंडर राशि में समान रेट रहने पर आरक्षण का प्रावधान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी है। इसके साथ ही कैबिनेट ने एक तीन सदस्यीय कमेटी के गठन को भी मंजूरी दी है, जो सरकारी नौकरियों में गरीब सवर्ण के लिए आरक्षण की सीमा तय करेगी। माना जा रहा है कि माझी राज्य में दलित और गरीब सवर्ण का एक सामाजिक लामबंदी करने का प्रयास कर रहे हैं।

कैबिनेट ने असहाय महिलाओं को खाद्य सुरक्षा का लाभ और स्कूलों में हाजिरी की सीमा भी 75 से घटा कर पचास फीसदी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आज की बैठक में माझी गुट के एक मंत्री शाहीद अली नदारद रहे। इससे पूर्व माझी ने आज मंत्रियों के इस्तीफे से खाली पडे विभागों को बचे हुए मंत्रियों के बीच बांट दिया।

इसी क्रम में सीएम मांझी ने मंगलवार को अपने मंत्रियों के साथ बैठक की और रणनीति को अंतिम रूप दिया। समर्थन के बदले विधायकों को मंत्री पद का ऑफर दिया गया है । यह भी वादा किया गया है कि जो लोग अपने साथ ज्यादा विधायक लाएंगे, उन्हें उप मुख्यमंत्री का पद दिया जाएगा। वहीं, मांझी के पुराने समर्थक मंत्री सरकार बचाने के लिए अपनी कुर्सी दूसरों के लिए छोड़ने को तैयार हो गए हैं। मांझी समर्थक माने जाने वाले मंत्री विनय बिहारी ने कहा है कि हम सदन में अपना बहुमत साबित कर देंगे। सरकार के लिए जो जरूरी आंकड़े हैं, वो हम लोगों के पास हैं । हमारी कई लोगों से बातचीत हुई है। वे सभी आने के लिए तैयार हैं। जो लोग हमें समर्थन देंगे, हम उन्हें मंत्री पद देंगे।
विज्ञापन

माझी कैंप के निशाने पर अब स्पीकर

माझी कैंप शतरंज की बिसात पर अपने मोहरे बैठाने की कवायत में जुट गया है। यह लगभग तय है कि आनेवाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका खास रहनेवाली है। ऐसे में माझी कैंप के निशाने पर विस अध्यक्ष उदय नारायण आ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने लोजपा के पूर्व सांसद राजेश कुमार हत्या कांड की जांच सीबीआई से कराने की अपनी अनुशंसा कर दी है। मुख्यमंत्री के इस फैसले को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस जांच से स्पीकर उदय नारायण चौधरी की परेशानी बढ़ सकती है। तत्कालीन गया एसपी परेश सक्सेना ने अपरोक्ष रूप से इस मामले में स्पीकर उदय नारायण चौधरी को इस हत्या का साजिशकर्ता बताया था। राजनीति के जानकार मुख्यमंत्री के इस फैसले को स्पीकर को घेरने से देख रहे हैं। इससे पूर्व जदयू के बागी विधायक ज्ञाजेंद्र सिंह ज्ञानू ने श्री चौधरी को हत्या का आरोपी करार देते हुए इसकी जांच सीबीआइ की मांग की थी।

इमामगंज विधान सभा क्षेत्र से लोजपा प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद राजेश कुमार की 22 जनवरी 2005 में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की जब नए सिरे से तत्कालीन डीआईजी अरविंद पांडेय ने जांच शुरू किया तो उनका स्थानांतरण कर दिया गया था। इधर, निर्दलीय विधायक पवन जायसवाल की आज विधानसभा सचिव से झडप हो गयी। श्री जयसवाल विस अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने संबंधी प। लेकर सचिव हरेराम के पास गये थे। सचिव ने पत्र स्वीकार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वो ऐसे पत्र लेने के अधिकारी नहीं हैं। इसके बाद करीब एक घंटे तक दोनों में नोंकझौंक होती रही। अंत में श्री जायसवाल पत्र वहीं छोड कर वापस चले गये।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें