बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने धर्मनिरपेक्षता के बहाने नरेंद्र मोदी पर निशाना क्या साधा, मोदी समर्थक भाजपा नेताओं ने कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी-जदयू की 17 साल पुरानी दोस्ती के लिए ये खतरे की घंटी है।
नीतीश कुमार की बयानबाजी से नाराज बिहार बीजेपी के नेताओं की दिल्ली में आज पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात होनी है। ये नेता राजनाथ से नीतीश के रवैये की शिकायत करेंगे।
उधर, बिहार की गठबंधन सरकार के पशुपालन मंत्री गिरिराज ने सीधे तौर पर नीतीश पर हमला करते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने गठबंधन धर्म का अपमान किया है। मोदी का अपमान कर उन्होंने बीजेपी का अपमान किया।
गिरिराज सिंह ने कहा कि इस ढंग से अपमानित होकर गठबंधन में बने रहने का कोई मतलब है। उन्होंने कहा कि बिहार बीजेपी के नेता इस संबंध में अपना पक्ष पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के सामने रखेंगे।
उन्होंने कहा कि नीतीश बार-बार भाजपा को इस तरह से बेइज्जत नहीं कर सकते हैं। यदि उन्हें लड़ने का इतना ही शौक है तो उन्हें खुलकर मैदान में सामने आ जाना चाहिए। नीतीश के बयान से बौखलाई भाजपा अब उन्हें और ज्यादा बर्दाश्त करती दिखाई नहीं दे रही है।
'नीतीश से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं'
वहीं भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि पार्टी को नीतीश कुमार से धर्मनिरपेक्षता पर प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि विभिन्न पदों पर बैठे भाजपा के सभी नेता सेकुलर (धर्मनिरपेक्ष) हैं।
लेखी ने कहा कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में नए नहीं हैं। जब 2002 में गोधरा कांड हुआ था तो वे रेल मंत्री थे।
जनता दल (यूनाइटेड) भाजपा का पुराना सहयोगी है और उनसे सहयोगी की तरह हर मुद्दे पर बातचीत व सलाह ली जाती है।
'अपने पद से इस्तीफा दें नीतीश'
इधर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रामेश्वर चौरसिया ने गोधरा कांड के समय नीतीश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि बतौर रेल मंत्री वे साबरमती एक्सप्रेस हिंसा को रोकने में नाकाम रहे थे।
चौरसिया ने कहा कि साबरबती हादसा रोकने में नाकाम रहने पर नीतीश कुमार को अपने पद इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने जेडीयू पार्टी के सदस्यों से पार्टी छोड़ने की अपील की।