लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद कांग्रेस में बगावत का सिलसिला जारी है। फिलहाल हरियाणा, असम, महाराष्ट्र के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
महाराष्ट्र के मंत्री नारायण राणे और असम के 33 विधायकों के इस्तीफे से पार्टी में हड़कंप मचा है। इसी तरह हरियाणा में बीरेंद्र सिंह ने मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है।
नेशनल कांफ्रेंस से अलग होकर कश्मीर में अकेले चुनाव लड़ने से पहले ही पार्टी को झटका लगा है। जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस के पूर्व सांसद लाल सिंह ने पार्टी छोड़ दी है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल जगदंबिका पाल के मुताबिक आने वाले समय में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है।
महाराष्ट्र के मंत्री राणे का इस्तीफा
बीते हफ्ते किए अपने ऐलान के मुताबिक महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री नारायण राणे ने पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वह पार्टी में बने रहेंगे लेकिन बाद में इस बारे में विचार करेंगे।
राणे सोमवार सुबह मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से मिले और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने राणे का इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनिया गांधी से विचार विमर्श के बाद इस पर फैसला लेंगे। कोंकण इलाके के कद्दावर नेता नारायण राणे विलास राव देशमुख और अशोक चव्हाण के नेतृत्व की लंबे समय से आलोचना कर रहे थे।
कांग्रेस में शामिल होने से पहले राणे शिवसेना में थे और भाजपा-शिवसेना सरकार में मुख्यमंत्री भी रहे। इस्तीफे की वजह पूछ जाने पर राणे ने कहा कि ‘मुझसे जो वादे किए गए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया। अधिकारी काम नहीं कर रहे और जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी। ऐसी स्थिति में मैं इस्तीफा देने पर मजबूर हो गया।’
सूत्रों के मुताबिक वह चव्हाण के नेतृत्व से खुश नहीं हैं और चाहते थे कि आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए। राणे ने यह भी कहा है कि चव्हाण के नेतृत्व में चुनाव जीतना मुश्किल होगा।
हरियाणा में सीएम के खिलाफ बगावत
लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद से ही हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ बगावती सुर उठते रहे हैं। कई बार उन्हें हटाए जाने की मांग की जा चुकी है।
हाल ही में वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले थे जिसके बाद कांग्रेस ने हुड्डा के ही नेतृत्व में अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही थी।
अब कांग्रेस के एक और बड़े नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि वह हुड्डा के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ेंगे। बीरेंद्र ने कहा कि हुड्डा के नेतृत्व में नतीजे नहीं आएंगे।
असम की गोगोई सरकार पर संकट
असम में कांग्रेस की तरुण गोगोई सरकार पर संकट मंडरा रहा है। पार्टी के 78 में से 32 विधायक मौजूदा मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कामकाज से नाखुश हैं।
एक मंत्री समेत सभी 32 विधायकों ने राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया है। शिक्षा मंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में बागी विधायक तरुण गोगोई को पद से हटाए जाने की मांग कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद गोगोई ने पार्टी नेतृत्व से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी जिसे सोनिया गांधी ने नामंजूर कर दिया था। हेमंत ने बताया कि उन्होंने अंतर आत्मा की आवाज सुनकर अपना इस्तीफा दिया।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का समर्थन कर रहे हैं। पार्टी ने पूरे मामले को सुलझाने के लिए सीपी जोशी और खड़गे की कमेटी बनाई है। लोकसभा चुनाव के दौरान असम में कांग्रेस की करारी हार के बाद से ही बागी विधायक आलाकमान से नेतृत्व बदलने की मांग कर रहे हैं।
जम्मू कश्मीर में कांग्रेस को बड़ा झटका
नेशनल कांफ्रेंस से अलग होकर जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरने का ऐलान कर चुकी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।
रियासत में कांग्रेस के पूर्व सांसद लाल सिंह ने पार्टी छोड़ दी है। सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस से गठबंधन टूटने के कुछ ही घंटों के भीतर लाल सिंह ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काटकर गुलाम नबी आजाद को दिया गया था, जिससे वह खफा थे। उनके पीडीपी में शामिल होने की बातें कही जा रही हैं लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।