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मुंबई के 26/11 हमले को लेकर बड़ा खुलासा

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अगर भारत, ब्रिटेन और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जुटाई सूचनाओं का आदान-प्रदान करतीं और उन्हें गंभीरता से लेतीं, तो शायद मुंबई पर 26/11 को हुए भीषण आतंकी हमले को रोका जा सकता था। यह खुलासा न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में हुआ है।
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रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई हमले को अंजाम देने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के तकनीकी प्रमुख जरार शाह के ई-मेल और उसकी गतिविधियों पर ब्रिटेन और भारत की खुफिया एजेंसियों की नजर थी। लेकिन, दोनों एजेंसियों ने न तो प्राप्त सूचनाओं को गंभीरता से लिया और न ही सूचनाओं को एक कड़ी में जोड़ पाईं। एजेंसियां यह नहीं भांप पाई कि इतने बड़े हमले की साजिश रची जा रही है।

पूर्व भारतीय और अमेरिकी खुफिया अधिकारियों और एडवर्ड स्नोडन के लीक किए गए अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2008 तक शाह की हरकतों पर ब्रिटिश और भारतीय खुफिया अधिकारियों की नजर थी।
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हेडली की पत्नी ने किया था हमले का इशारा

रिपोर्ट में हमले के वक्त भारत के विदेश सचिव रहे शिवशंकर मेनन के हवाले से लिखा गया है कि किसी ने इस हमले की व्यापक तस्वीर पेश नहीं की थी। बाद में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने मेनन ने कहा कि केवल हमले के बाद सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ और तब जाकर पता चला कि इन सूचनाओं का संबंध मुंबई हमले से था।

ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने शाह के ई-मेल से काफी सूचनाएं जुटाई थीं लेकिन उनका कहना है कि वे सूचनाएं सटीक नहीं थीं। अमेरिका से चेतावनी मिलने के बाद भी भारतीय एजेंसियां अलर्ट नहीं हुई थीं। मुंबई में हमलों के लिए लक्ष्य तय करने में सहयोग करने वाले लश्कर आतंकी डेविड कोलमैन हेडली के बारे में सूचनाओं को अमेरिकी एजेंसियों ने गंभीरता से नहीं लिया। हेडली से नाखुश उसकी पत्नी ने एजेंसियों को काफी पहले ही बता दिया था कि वह मुंबई में एक रहस्यमयी मिशन को अंजाम देने में लगा है।

लश्कर का तकनीकी प्रमुख शाह था मास्टरमाइंड
उत्तरी पाकिस्तान के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले 30 वर्षीय जरार शाह ने मुंबई हमले के लक्ष्य तय करने के लिए गूगल अर्थ का सहारा लिया था। उसने अपने मौजूदगी स्थल को छिपाने के लिए एक इंटरनेट फोन सिस्टम बनाया था, जिससे वह कॉल के मार्ग में बदलाव कर उसे वाया न्यूजर्सी कर दिया करता था।
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