सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पतालों को तेजाब हमले के शिकार व पीड़ितों का मुफ्त में इलाज करने का आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़ितों का इलाज करने से इनकार नहीं कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने निजी अस्पतालों को पीड़ितों का मुफ्त में इलाज करने का आदेश देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इलाज में प्लास्टिक सर्जरी भी शामिल है। साथ ही अदालत ने कहा कि निजी अस्पताल इलाज करने में किसी तरह की उदासीनता नहीं दिखाएंगे।
इसके अलावा निजी अस्पताल को एसिड अटैक पीड़ितों को एक सर्टिफिकेट भी जारी करना होगा। जिस अस्पताल में पीड़ित को इलाज के लिए पहली बार ले जाया जाएगा, वही अस्पताल यह सर्टिफिकेट जारी करेगा।
सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण होगा कि वह व्यक्ति एसिड अटैक पीड़ित है, जिससे उसे भविष्य में इलाज कराने में कोई परेशानी न पेश आए।
उदासीनता बर्दाश्त नहीं होगी: SC
शीर्ष अदालत एसिड अटैक पीड़ित लक्ष्मी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान लक्ष्मी की ओर से पेश वकील अर्पणा भट्ट ने पीठ के समक्ष कहा कि अधिकतर निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़ित को दाखिला देने से इनकार करते हैं।
निजी अस्पताल पीड़िताओं पर सरकारी अस्पताल में दाखिल होने का दबाव डालते हैं। इस वजह से बहुमूल्य समय नष्ट होता है और पीड़ित की स्थिति खराब हो जाती है। कई की तो मौत भी हो जाती है।
शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि तमाम निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़ितों का इलाज करेंगे और वह भी मुफ्त में।
साथ ही अदालत ने सरकारों से कहा कि पीड़ितों को कम से कम तीन लाख रुपये मुआवजा मिलना चाहिए। अदालत ने पाया कि कई राज्य पीड़ितों को उचित मुआवजा नहीं दे रहे हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि गत वर्ष 18 जुलाई को जारी आदेश का सख्ती से पालन होना चाहिए। इस आदेश में एसिड की खुली बिक्री पर पाबंदी लगाई गई थी। बगैर पहचान पत्र के एसिड की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।
लाइसेंस प्राप्त दुकानदार ही एसिड की बिक्री कर सकते हैं। दुकानदारों को एसिड के खरीदार का रिकार्ड भी रखने के लिए कहा गया था। एसिड की अवैध ब्रिकी को गैर जमानती अपराध बना दिया गया था।
सबसे ज्यादा एसिड अटैक के मामले यूपी में
सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि 2014 में देशभर में एसिड अटैक के309 मामले सामने आए। एसिड अटैक की सबसे अधिक घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुईं। यहां कुल 185 ऐसी घटनाएं हुईं। 2011 में एसिड अटैक के 83 मामले आए थे। 2012 में 85 जबकि 2013 को 66 मामले सामने आए थे।
अमर उजाला की मुहिम को पाठकों का साथ
तेजाब पीड़ितों के सशक्तीकरण के लिए ‘अमर उजाला’ फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रम के तहत अब तक एक दर्जन से अधिक पीड़ितों के इलाज और शिक्षा के लिए आर्थिक मदद पहुंचाई गई है।
पांच लाख रुपये से शुरू हुए हमारे ‘अमर उजाला फाउंडेशन एसिड विक्टिम एंपावरमेंट फंड’ को अमर उजाला के पाठकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। इसका इस्तेमाल भारती, अर्चना, पद्मा, रुकैया, आतिफ, दीपमाला और कविता जैसे कई पीड़ितों के लिए किया गया है।
हल्द्वानी की तेजाब पीड़िता जहांआरा के लिए स्थानीय स्तर पर अभियान चलाकर ब्यूटी पार्लर खोला गया, वहीं बरेली के पीड़ित युवक नाजिम के लिए जिला उद्योग केंद्र से 4 लाख रुपये का ऋण मुहैया कराया गया है।
तेजाब पीड़ितों की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए 21 फरवरी 2015 को दिल्ली के तीन मूर्ति ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय परिचर्चा ‘अदम्य’ का आयोजन भी किया गया।
इसमें मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने तेजाब पीड़ितों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया था। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला भी जल्द शुरू की जाएगी।