भारत एक बार फिर से भूकंप के झटकों से हिल गया है। छह महीने पहले नेपाल में आए भूकंप की तबाही का मंजर अभी भारत के लोगों के जहन से मिटा ही था कि एक बार फिर से भूकंप के झटकों ने उस मंजर की यादें ताजा कर दी। सोमवार की दोपहर 2:39 मिनट पर अफगानिस्तान के हिंदू कुश की पहाड़ियों में आए इस भूकंप का असर भारत में दिखाई दिया।
दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। युरोपियन मेडिटेरेनियन सिस्मोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक सोमवार की दोपहर 2:39 मिनट पर अफगानिस्तान के हिंदू कुश की पहाड़ियों में 7.7 तीव्रता के तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए।
इससे पहले 25 अप्रैल को नेपाल के लामजुंग में 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे जिसने बिहार के हिलाकर रख दिया था। यहां पर इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6 रही। वहीं दिल्ली में भूकंप की तीव्रता 5 थी।
कब-कब हिला भारत
रिक्टर स्केल पर पांच से अधिक तीव्रता का भूकंप खतरनाक माना जाता है। इससे पहले पिछले साल 21 मार्च को अंदमान व निकोबार द्वीप समूह में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया था। हालांकि उस भूकंप में किसी की जान नहीं गई थी।
इससे पहले 2012 में 25 अप्रैल को अंदमान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके अलावा 18 सितंबर, 2011 को सिक्किम में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 118 व्यक्तियों की जान गई थी। भारत में भूकंप का इतिहास यहीं खत्म नहीं होता। 10 अगस्त, 2009 में अंदमान में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में 26 लोगों की जान गई थी। 2005 में कश्मीर में भूकंप ने भयानक तबाही मचाई थी। पाकिस्तान समेत कश्मीर में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था। उस भूकंप में दोनों मुल्कों में 130,000 लोगों की मौत हो गई थी।
26 दिसंबर, 2004 में इंडोनेशिया में आए उस भूकंप का मंजर तो लोगों के दिलों में एक दशक बाद भी ताजा है जिसके बाद भारत के एक बड़े हिस्से में सुनामी आ गई थी। एक भूकंप ने भारत में भयानक तबाही मचाई थी। उस भूकंप के बाद आई सुनामी में भारत, श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया समेत हिंद महसागर में बसे कई मुल्कों में भारी नुकसान हुआ था। कुल 283,106 लोग मारे गए थे। 26 जनवरी, 2001 को गुजरात के भुज में आए भूकंप में 20,000 लोगों की मौत हुई थी।