चैत्र प्रतिपदा, 21 मार्च से शुरू हो रहा कीलक नव संवत्सर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों के कारण भारत के लिए लाभप्रद रहेगा। मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी लेकिन आपदाएं भी आएंगी। अमेरिका के न्यूयार्क, सेन फ्रांसिस्को और लॉस एंजिल्स में तेज भूकंप के झटके महसूस किए जाएंगे।
भारत के समुद्र तट वाले इलाकों में भी भूकंप आएगा। यह भविष्यवाणी बीएचयू के ज्योतिष विभाग से प्रकाशित ‘विश्व पंचांग’ में की गई है। इस पंचांग में नव संवत्सर के फलित में दक्षिण भारत में अकाल और नदियों में बाढ़ आने की भी भविष्यवाणी की गई है।
नव संवत्सर कीलक का राजा शनि और मंत्री मंगल होगा। दोनों पाप ग्रह होने के बावजूद मैत्री भाव में नहीं रहेंगे। इसलिए शुभ-अशुभ में खींचतान की स्थिति बनी रहेगी। बृहस्पति, शुक्र और शनि ग्रहों के योग सक्षम और बेहतर स्थिति में होने की वजह से व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भारत का विश्व में वर्चस्व बढ़ेगा।
मोदी सरकार में वर्चस्व के लिए अंतर्कलह
बीएचयू के वेद विभाग के ज्योतिषाचार्य डॉ. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी के मुताबिक कीलक का आशय किसी चीज को उभारने से है इसलिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समस्याएं खूब उभरेंगी लेकिन समाधान भी होता रहेगा। वर्ष के राजा और मंत्री के स्वभाव में मेल न होने की वजह से शासक वर्ग में मतभेद बना रहेगा। मंत्रिमंडल में भीतरी तनाव की स्थिति बनी रहेगी। वर्चस्व के लिए अंतर्कलह बनी रहेगी।
देश के दक्षिण भाग केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र में अकाल की स्थिति रहेगी। समुद्र तट वाले इलाकों में अतिवृष्टि के साथ चक्रवात, सुनामी जैसे तूफान भी आ सकते हैं। विश्व पंचांग में दिए गए नव संवत्सर के फलित में न्यूयार्क, लॉंस एंजिल्स, सेन फ्रांसिस्को में भूकंप के झटके आने की भविष्यवाणी की गई है।
दक्षिणी समुद्री तट वाले इलाकों के साथ ही महाराष्ट्र के रत्नागिरि, कोल्हापुर, पुणे, एमपी के सतारा, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में भूकंप आ सकता है। इसके अलावा देश के पर्वतीय क्षेत्र भी भूकंप के झटकों से कांपेंगे।
ज्योतिषीय गणना पर आधारित भविष्यवाणी सच होती है। नौ ग्रहों से ही पूरा सौरमंडल संचालित होता है। ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति पर आधारित गणना से भविष्य का सटीक अनुमान किया जाता है। 90 वर्ष से लगातार प्रकाशित हो रहे विश्व पंचांग ने हमेशा ग्रहों की गणना के आधार पर राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, कृषि और व्यापारिक स्थितियों पर सटीक भविष्यवाणी की है। - प्रो. रामचंद्र पाठक, संपादक- विश्व पंचांग-बीएचयू