मैंने खुली आंखों से सपना देखा था। ऐसा सपना जो कामयाबी और शोहरत की बुलंदियों की ओर जाता है। माध्यम बनाया बेटियों को। बेटियों ने भी इस उम्मीद को परवाज दिया।
एक बेटी भारतीय प्रशासनिक सेवा में परचम लहराने पहुंच गई, तो दूसरी बीटेक कर चुकी है। सबसे छोटी बेटी भी अपने बड़ी बहनों के नक्शेकदम पर चलने की तैयारी में जुटी है।
नगर के मिशन कंपाउंड में रहने वाले राम कुमार निरंजन अपनी बेटियों के बुलंदी पर पहुंचने की बात गर्व के साथ कुछ इसी अंदाज में कहते हैं। यह बताते हुए उनके चेहरे पर एक चमक होती है। लगता है मानो, जिंदगी की तपस्या का सारा फल उन्हें मिल चुका हो।
पेशे से ठेकेदार राम कुमार कहते हैं कि उन्होंने अपने परिवार में महिलाओं के प्रति उपेक्षा भाव को देखते हुए प्रण लिया था कि वह अपनी बच्चियों को ऐसे माहौल से दो- चार नहीं होने देंगे।
हमेशा अपनी बेटियों को सच्चाई व ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। लालन - पालन में अपने पुत्र और पुत्रियों में कोई भेदभाव नहीं रखा। घर का शैक्षणिक माहौल इस प्रकार रखा कि सभी बच्चे शुरू से ही पढ़ने में अव्वल रहें।
वह कहते हैं कि आमतौर पर मां- बाप का सपना होता है कि बच्चे इंजीनियर या डॉक्टर बनें लेकिन बड़ी बेटी प्रियंका निरंजन ने इंजीनियरिंग में प्रवेश मिलने के बाद भी जब बीए करने का निर्णय लिया, तब भी उसका साथ दिया।
प्रियंका ने पीएचडी एक साल कर जब सिविल सिर्विसेज की तैयारी करने की योजना बनाई, तब भी वह उसके साथ थे।
प्रियंका ने उनका मान रखा, पहले उसने यूपीपीएससी पास की और डिप्टी कलक्टर बनीं और फिर 2012 में यूपीएससी की परीक्षा में आल इंडिया रैंक में बीसवां स्थान और हिंदी विषय से बालिकाओं में प्रथम स्थान हासिल कर वह खुशी दी, जिसकी चाह हर पिता को हो सकती है।
उनकी दूसरी बेटी प्रीति निरंजन ने बीटेक किया है। वह बरेली में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। तीसरी पुत्री आराधना मिरांडा हाउस (दिल्ली विश्वविद्यालय) से एमएससी कर रही है।
अब तक की उसकी शैक्षिक गतिविधियां बता रही हैं कि वह भी अपनी बड़ी बहनों की तरह सफलता की राह पर है। बेटा आर्यन अभी 12 वीं कक्षा में है।
फक्र के साथ राम कुमार कहते हैं कि बेटियों के साथ- साथ वह खुद को भी आगे बढ़ता महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि जिस सपने को उन्होंने वर्षों पहले देखा था, वह पूरा हो रहा है।
प्रियंका की सफलता पर जिस तरह नगर में जगह- जगह सम्मान समारोह आयोजित हुए, उन्हें अहसास कराया कि बेटियां भी पिता के भाल को ऊंचा कर सकतीं हैं।