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विभागों की तकरार में फंसी एक्सप्रेस वे की 'रफ्तार'

Thu, 04 Apr 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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दिल्ली से जयपुर, चंडीगढ़ और मेरठ के बीच नए एक्सप्रेस वे निर्माण की महत्वाकांक्षी योजनाएं दो ताकतवर सरकारी विभागों की तकरार में फंसती जा रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक्सप्रेस वे निर्माण में योजना आयोग के दखल पर कड़ा एतराज किया है।
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बुधवार को सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए हुई सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और योजना आयोग की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रहा। इस मामले की शिकायत एनएचएआई अध्यक्ष आरपी सिंह ने योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से भी की है।

एनएचएआई को सबसे ज्यादा आपत्ति इस बात पर है कि एक्सप्रेस वे की जवाबदेही तो एनएचएआई की है, लेकिन इससे जुड़े फैसले योजना आयोग के सलाहकार गजेंद्र हल्दिया ले रहे हैं। एनएचएआई अध्यक्ष आरपी सिंह ने अपने पत्र में दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे निर्माण से जुड़े अहम प्रशासनिक फैसले हल्दिया की अध्यक्षता वाली स्टीयरिंग कमेटी द्वारा लिए जाने पर आपत्ति जाहिर की है।
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उनका तर्क है कि जिस विभाग पर वित्तीय जवाबदेही है, उसे ही प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार मिलना चाहिए। योजना आयोग के दखल से नाराज एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पूरी तरह आयोग के हवाले करने का प्रस्ताव दे डाला है।

कौन उठाएगा एक्सप्रेस वे का खर्च
योजना आयोग और एनएचएआई के टकराव में नए एक्सप्रेस वे के वित्त पोषण का मामला भी अटका हुआ है। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि दिल्ली से जयपुर और चंडीगढ़ के लिए प्रस्तावित एक्सप्रेसवे निर्माण का खर्च कैसे जुटाया जाएगा।

शुरुआती अनुमानों के हिसाब से इन एक्सप्रेस वे पर प्रति किलोमीटर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च आएगा। यह रकम सिर्फ टोल के जरिए जुटानी मुश्किल है। ऐसे में क्या रीयल एस्टेट के जरिए सड़क निर्माण का खर्च जुटाया जा सकता है, इस पर भी नीतिगत निर्णय होना बाकी है।

लक्ष्य से पीछा छुड़ाने की तैयारी
रोजाना 20 किलोमीटर सड़क निर्माण के लक्ष्य से चूकी सरकार अब लक्ष्य तय करने से ही कतरा रही है। बुधवार को हुई मंत्रालय की अहम बैठक में एनएचएआई ने इस साल सड़क निर्माण के टेंडर अवार्ड करने का लक्ष्य तय न करने का संकेत दिया है।

दलील है कि टेंडर अवार्ड करने में कई चीजें सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं, ऐसे में लक्ष्य तय करना उचित नहीं है। माना जा रहा है कि अगर एनएचएआई लक्ष्य तय नहीं करती है तब योजना आयोग अपनी तरफ से लक्ष्य जारी कर सकता है।
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