राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दावा है कि वह महाराष्ट्र में स्थिर सरकार की पक्षधर है, इसलिए भारतीय जनता पार्टी को बिना शर्त समर्थन दे रही है। हालांकि राजनीतिक जानकार राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) की सफाई से कतई इत्तफाक नहीं रखते।
माना जा रहा है कि एनसीपी की दरियादिली का कारण पार्टी के दो आला नेताओं अजीत पवार और सुनील तटकरे पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप हैं। दोनों नेताओं के कारनामों की एक फाइल महाराष्ट्र के एक आला अधिकारी की मेज पर 40 दिनों से पड़ी है।
फाइल में दोनों नेताओं के खिलाफ ओपेन इन्क्वायरी की सिफारिश की गई है। उल्लेखनीय है कि अजीत पवार एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे हैं और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। जबकि सुनील तटकरे एनसीपी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हैं।
फाइल में अजीत पवार के खिलाफ जांच के सिफारिश
राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक प्रवीण दीक्षित ने 22 अगस्त को गृह मंत्रालय से अजीत पवार और सुनील तटकरे के खिलाफ ओपेन इन्क्वायरी की इजाजत मांगी थी। कांग्रेस-एनसीपी की पिछली सरकार में दोनों नेताओं के पास जल संसाधन मंत्रालय था।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण वाटगांवकर का कहना है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में सिंचाई की दर्जनों परियोजनाएं राज्य सरकार के नियमों का उल्लंघन करके आवंटित कर दी गई।
एंटी करप्शन ब्यूरों के आवेदन के बाद गृहमंत्रालय ने मामले का गहन अध्ययन किया। गृह मंत्रालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव अमिताभ राजन ने सिंचाई परियोजनाओं पर दी गई माधव चिताले कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन किया। ये रिपोर्ट इसी वर्ष एक मार्च को दी गई थी।
मंत्रालय ने सिंचाई परियोजनओं के प्रबंधन पर दी गई कैग की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया।
सिफारिश मानी गई तो अजीत पवार को होगी मुश्किल
सूत्रों के मुताबिक, राजन ने सिंचाई विभाग के कई अधिकारियों के खिलाफ भी ओपेन इन्क्वायरी का अदेश दिया। गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सिंचाई विभाग में हुई गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने के लिए मामले में ओपेन इन्क्वायरी की सिफारिश मान ली गई।
उन्होंने बताया कि ओपेन इन्क्वायरी में किसी मामले में सार्वजनिक पदों पर बैठें लोगों की जवाबदेही तय की जाती है। एक सितंबर को गृहमंत्रालय के मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रीय को 31 पन्नों की एक रिपोर्ट सौंपी गई।
उन्होंने वो रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (प्रोटोकॉल) सुमित मलिक को भेज दी। वहां से वो फाइल राज्य सचिव (लीगल) को भेजी गई और एक पत्र के जरिए एडवाकेट जनरल डेरियस खंभाटा की राय मांगी गई।
एक बार फिर वो फाइल याद आ गई
सूत्रों का कहना है कि खंभाटा ने मामले में सकारात्मक राय दी और रिपोर्ट चीफ सेक्रेटरी को सौंप दी गई। 26 सितंबर को कांग्रेस और राष्ट्रवारी पार्टी को गठबंधन टूट गया, जिसके बाद पृथ्वीराज चह्वाण ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
चह्वाण के इस्तीफे कारण मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए गृहमंत्रालय को राज्यपाल विद्यासागर राव की सहमति की आवश्यकता पड़ी। हालांकि राज्यपाल के सलाहकार अनिल बैजल ने बताया कि उन्हें ऐसी किसी सिफारिश या फाइल की जानकारी नहीं है।
रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजे आते ही एनसीपी ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए समर्थन का प्रस्ताव दिया। जबकि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने एक दूसरे पर खुला हमला किया था।
एनसीपी की जल्दबाजी को देखकर जानकारों की एक बार फिर वो फाइल याद आ गई।