दूसरी दफा ताजपोशी का रास्ता साफ हो जाने के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी अब पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने में लग गए हैं। इसके लिए वे सबसे पहले प्रदेश संगठन में ऐसे लोगों को लाना चाहते हैं जो आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हों।
इसी रणनीति के तहत गडकरी अब सभी प्रदेशों के प्रमुख नेताओं को दिल्ली तलब कर संगठन को दुरुस्त करने के लिए मंत्रणा में जुट गए हैं। पार्टी अध्यक्ष के तौर पर गडकरी की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा आगामी लोकसभा चुनाव हैं। भाजपा सूरजकुंड सम्मेलन में भी कह चुकी है कि लोकसभा चुनाव कभी भी हो सकते हैं। इसलिए अगले एक साल के भीतर लोकसभा चुनाव तय मानकर भाजपा तैयारी में जुट गई है। इसलिए गडकरी अभी से प्रत्येक प्रदेश इकाई के शीर्ष नेता को दिल्ली तलब कर संगठन के चुनाव और लोकसभा चुनाव की तैयारी का जायजा लेने में लगे हैं।
इसी कवायद के तहत उन्होंने शनिवार को दिल्ली व जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ अलग-अलग विचार मंथन किया। इससे पहले वे हरियाणा के नेताओं से भी मंथन कर चुके हैं। इन बैठकों में मुख्यत: दो सूत्री एजेंडा रहा। एक तो उन्होंने संगठन की चुनाव प्रक्रिया के तहत प्रदेश इकाई के लिए नए नाम पर आम सहमति अथवा चुनाव को लेकर नेताओं का मन टटोला गया। इसके साथ ही लोकसभा के चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम को लेकर भी चर्चा की।
भाजपा के संगठन चुनाव चल रहे हैं और अब तक जिलास्तर तक चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस साल दिसंबर तक ये चुनाव संपन्न हो जाने हैं। प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव हो जाने के बाद ही गडकरी की दोबारा ताजपोशी के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी। माना जा रहा है कि इसीलिए वे प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ठोक बजाकर ही नाम तय करने की कोशिश में लगे हैं।