विधान मंडल सत्र के आखिरी दिन नीतीश कुमार ने बड़ा सियासी दांव खेला।
एक ओर जहां तेली समाज और चौरसिया को अति पिछड़ा वर्ग में लाकर भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी का प्रयास किया है, वहीं गरीब सवर्णों को प्रोत्साहित कर लालू फैक्टर को कमजोर करने की भी कोशिश की है।
बिहार विधानसभा चुनाव में जाने से पहले जातिगत समीकरण साधने के लिए यह नीतीश कुमार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के वोट बैंक माने जाने वाले सवर्णों और वैश्यों को एक साथ तोहफा देकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बुधवार को गरीब सवर्ण छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का एलान कर दिया।