16 दिसंबर को हुए निर्भया कांड पर बीबीसी की बनाई गई डॉक्यूमेंट्री को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर संसद में जमकर हंगामा देखने को मिला। पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देश के गृहमंत्री सामने आए। उन्होंने पहले राज्यसभा में फिर लोकसभा में इस मुद्दे पर सरकार का जवाब रखा।
दोनों ही सदनों को उन्होंने विश्वास दिलाया कि ये डॉक्यूमेंट्री लोगों को नहीं दिखाई जाएगी। राजनाथ सिंह के मुताबिक इसे प्रसारित नहीं होने दिया जाएगा।
मामले पर जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने इस डॉक्युमेंट्री को लेकर कोई इजाजत नहीं दी,
इस पर पिछली सरकार ने अनुमति दी थी।
हालांकि यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे
सुशील शिंदे ने इस मुद्दे को सिरे से नकार दिया। उन्होंने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि भले ही डॉक्यूमेंट्री को लेकर 2013 में रजामंदी दी गई हो लेकिन यह मामला उनके
संज्ञान में कभी नहीं लाया गया।
दूसरी ये मामला न्यायालय में भी पहुंच गया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भी डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण पर रोक का आदेश जारी किया है।
'नहीं होगा डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण'
इससे पहले केन्द्रीय गृहमंत्री ने राजनाथ सिंह ने संसद में बयान देते हुए कहा कि डॉक्यूमेंट्री बनाने को लेकर सशर्त इजाजत दी गई थी। रिसर्च के
नाम पर ये इजाजत दी गई। लेकिन डॉक्यूमेंट्री बनाने के दौरान शर्तों को
तोड़ा गया। हमें जो डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई वो संपादित थी और असली वर्जन
नहीं दिखाया गया।
केन्द्रीय गृहमंत्री ने सदन को विश्वास दिलाया कि आखिर इस डॉक्यूमेंट्री को बनाने की इजाजत कैसे और किसने दी इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी है। साथ ही सरकार ने इस इंटरव्यू के प्रसारण पर भी रोक लगाने की बात कही है।
हालांकि इस मुद्दे पर राज्यसभा में जमकर हंगामा नजर आया। डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाए या नहीं इस मुद्दे पर सांसद बंटे नजर आए। जहां कुछ सांसदों ने इस डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण पर रोक के साथ इसे बनाने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
वहीं कुछ सांसद ऐसे भी थे जिन्होंने डॉक्यूमेंट्री दिखाने की पैरवी की। डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण के पक्ष में जो सांसद थे उनमें जावेद अख्तर और अनु आगा का नाम शामिल हैं।
डॉक्यूमेंट्री पर सदन में दिेखे दो मत
राज्यसभा सांसद जावेद अख्तर ने इस मुद्दे पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए
कहा कि अच्छा हुआ ये डॉक्यूमेंट्री बनी, आखिर अब पता चलेगा कितने लोग हैं
जो उस रेपिस्ट के जैसी सोच रखते हैं।
जावेद अख्तर यहीं नहीं रूके उन्होंने इस मुद्दे पर आगे कहा कि इंटरव्यू से भी ज्यादा गंदी बातें संसद में कही गई।
दूसरी ओर इस मुद्दे पर कई सांसदों ने सरकार से सवाल किया कि आखिर घटना को हुए दो साल से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी अब तक बलात्कार के दोषियों को फांसी क्यों नहीं दी गई?
सांसद जया बच्चन ने बलात्कार के दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुझे बस ये जानना है कि आखिर दोषियों पर कार्रवाई कब की जाएगी।
बता दें कि जेडीयू सांसद केसी त्यागी ने राज्यसभा में 267 नियम के तहत बीबीसी डॉक्यूमेंट्री विवाद उठाने के लिए नोटिस दिया। जिसके बाद ये मामला सदन में उठा। जिस पर सांसदों ने सरकार से सवाल पूछे। हालांकि इस पूरे विवाद पर सदन बंटा हुआ नजर आया।
गैंगरेप दोषी पर कार्रवाई कब?
डॉक्यूमेंट्री विवाद में संसद में हंगामे के तुरंत बाद गृह मंत्रालय ने तिहाड़ के डीजी आलोक वर्मा को तलब किया। इस बीच डॉक्यूमेंट्री विवाद में गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के बीच एक बयान को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है।
जहां गृहमंत्री ने जेल में बलात्कार के आरोपी के इंटरव्यू कैसे हुआ, इसकी इजाजत किसने दी जैसे मुद्दों पर जांच की बात कही है। वहीं इस मामले पर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी के मुताबिक जेल में डॉक्यूमेंट्री को लेकर सशर्त इजाजत में कोई परेशानी नहीं है। पीएमओ से आदेश के बाद ही इंटरव्यू के लिए इजाजत दी गई। ऐसे में दिल्ली पुलिस इंटरव्यू के कंटेट को लेकर जांच करेगी।
आपको बता दें दिल्ली पुलिस ने मामले पर कार्रवाई करते हुए इंटरव्यू लेने वाले बीबीसी पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
सूत्रों
की मानें इस सनसनीखेज इंटव्यू में दोषी मुकेश ने कुछ ऐसी तीखी टिप्पणियां
की हैं, जिसको लेकर गृह मंत्रालय बेहद गंभीर नजर आ रहा है। मुकेश सिंह
निर्भया बलात्कार कांड में मृत्युदंड की सजा काट रहा है।